Mangal Sutra Rules: भारतीय हिन्दू समाज में विवाह केवल दो हृदयों के रिश्ते का सूत्र-बंधन नहीं माना गया है, बल्कि यह जन्म-जन्मांतर, यहां तक कि 7 जन्मों, का बंधन माना जाता है। दिलों के इस खूबसूरत बंधन की जीवंत पहचान है- ‘मंगलसूत्र’। हिन्दू संस्कृति में हर सुहागन महिलाएं इसे न केवल चाव से बल्कि गर्व से धारण करती हैं। पारंपरिक रूप से मंगल सूत्र काले मोतियों की माला से बना एक पेंडेंट या लॉकेट है, सुहाग की बेमिसाल निशानी है। हिन्दू धर्म में काले रंग का इस्तेमाल शुभ कार्यों और वस्तुओं में नहीं होता है। लेकिन मंगलसूत्र की बात सबसे अलग है। आइए जानते हैं, मंगलसूत्र के काले मोती क्यों खास माने जाते हैं और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या हैं?
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बुरी नजर से रक्षा
हिन्दू संस्कृति में मंगल सूत्र के काले मोतियों को एक प्रकार से ‘सेफ्टी बॉल्स’ या सुरक्षा कवच माना जाता है। शुभ कामों में काला रंग वर्जित होने के बावजूद मंगलसूत्र में काले मोती होना अनिवार्य है। धार्मिक मान्यता है कि मोती का यह रंग नेगेटिव एनर्जी और बुरी नजरों की शक्तियों को अपने अंदर सोंख लेता है। कहते हैं, यह ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे बच्चे को काला टीका लगाने असर होता है।
शिव-शक्ति संयोग
हिन्दू धर्म में मंगलसूत्र भगवान शिव और देवी पार्वती यानी शक्ति के पवित्र संगम का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इस सौभाग्य सूत्र में सोना धातु, माता पार्वती का शक्ति रूप है, जो समृद्धि और तेज का प्रतीक है। वहीं, माला के मनके यानी काले मोती भगवान शिव का प्रतिनिधि मांगे गए हैं, जो सुरक्षा की दीवार हैं। मान्यता है कि इन दोनों तत्वों का संयोजन पति-पत्नी के रिश्ते में शक्ति, ऊर्जा और अटूट बंधन को मजबूती देता है।
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गुरु-शनि का शुभ प्रभाव
हिन्दू धर्म में मंगलसूत्र को ज्योतिष दृष्टिकोण से भी बहुत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। इस शास्त्र की मान्यता है कि इस माला का धातु और रंग ग्रहों की स्थिति को संतुलित करता है। सोना धातु का संबंध ‘गुरु’ ग्रह है, वैवाहिक सुख, सौभाग्य, संतान, धन और ज्ञान के दाता और स्वामी ग्रह हैं। वहीं, काले मोतियों में शनि का वास माना जाता है, जो जीवन को स्थिरता और सुरक्षा देते हैं।
माला का हृदय चक्र से स्पर्श
जब सुहागन स्त्रियां मंगलसूत्र धारण करती हैं, तो उसका लॉकेट और मोती उसके हृदय के पास अनाहत चक्र को स्पर्श करता है। योग और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इससे शरीर की ऊर्जा में संतुलन बना रहता है। यह दंपति के रिश्ते को मजबूत बनाता है और उनमें आत्मीयता और रिश्तों की मधुरता बढ़ती रहती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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