Mahabharata Story: महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया था. इसी श्राप के कारण अश्वत्थामा आज भी धरती पर भटक रहा है. अश्वत्थामा को निर्जन स्थानों पर भटकने और किसी मानव समाज में न जाने का श्राप मिला था. अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक धरती पर भटकने का श्राप मिला था. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि, अश्वत्थामा आज भी धरती पर जीवित हैं और भटक रहे हैं. महाभारत काल के इस योद्धा के धरती पर भटकने का क्या कारण है? अश्वत्थामा को ऐसा श्राप क्यों मिला आइये इसके बारे में जानते हैं.
कौन थे अश्वत्थामा?
अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य और कृपी के पुत्र थे. अश्वत्थामा महाभारत के प्रमुख योद्धा में से एक थे. अश्वत्थामा का नाम चिरंजीवियों यानी अमर व्यक्तियों में गिना जाता है. अश्वत्थामा को अमर माना जाता है लेकिन उन्हें अमरता का वरदान नहीं बल्कि, श्राप मिला था. अश्वत्थामा ने महाभारत युद्ध के अंतिम चरण में था तब, अश्वत्थामा ने पांडवों के शिविर पर हमला किया था. इस दौरान अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पांचों पुत्रों यानी उपपांडवों का वध कर दिया था.
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अश्वत्थामा ने युद्ध के नियमों के विरुद्ध जाकर ऐसा किया था, इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को इसके लिए दंड दिया था. भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के मस्तक से मणि निकलवा दी. इससे अश्वत्थामा का तेज और शक्ति समाप्त हो गई. श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर अकेला भटकता रहने का श्राप दिया था. अश्वत्थामा को कभी भरने वाले घाव और असहनीय पीड़ा के साथ जीवित रहने का श्राप मिला था.
कलयुग के अंत तक भटकते रहेंगे अश्वत्थामा
अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक भटकने का श्राप मिला था. अश्वत्थामा ने जो अधर्म किया उसकी सजा काटते हुए भटकने का श्राप मिला. वह भगवान विष्णु के कल्कि अवतार आने तक ऐसे ही भटकेंगे. अश्वत्थामा कलयुग में धर्मयुद्ध में शामिल होंगे और श्राप में मुक्त होकर मोक्ष हासिल करेंगे.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Mahabharata Story: महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया था. इसी श्राप के कारण अश्वत्थामा आज भी धरती पर भटक रहा है. अश्वत्थामा को निर्जन स्थानों पर भटकने और किसी मानव समाज में न जाने का श्राप मिला था. अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक धरती पर भटकने का श्राप मिला था. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि, अश्वत्थामा आज भी धरती पर जीवित हैं और भटक रहे हैं. महाभारत काल के इस योद्धा के धरती पर भटकने का क्या कारण है? अश्वत्थामा को ऐसा श्राप क्यों मिला आइये इसके बारे में जानते हैं.
कौन थे अश्वत्थामा?
अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य और कृपी के पुत्र थे. अश्वत्थामा महाभारत के प्रमुख योद्धा में से एक थे. अश्वत्थामा का नाम चिरंजीवियों यानी अमर व्यक्तियों में गिना जाता है. अश्वत्थामा को अमर माना जाता है लेकिन उन्हें अमरता का वरदान नहीं बल्कि, श्राप मिला था. अश्वत्थामा ने महाभारत युद्ध के अंतिम चरण में था तब, अश्वत्थामा ने पांडवों के शिविर पर हमला किया था. इस दौरान अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पांचों पुत्रों यानी उपपांडवों का वध कर दिया था.
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कलयुग के अंत तक भटकते रहेंगे अश्वत्थामा
अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक भटकने का श्राप मिला था. अश्वत्थामा ने जो अधर्म किया उसकी सजा काटते हुए भटकने का श्राप मिला. वह भगवान विष्णु के कल्कि अवतार आने तक ऐसे ही भटकेंगे. अश्वत्थामा कलयुग में धर्मयुद्ध में शामिल होंगे और श्राप में मुक्त होकर मोक्ष हासिल करेंगे.
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