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भोजन करते वक्त पति-पत्नी को नहीं करनी चाहिए ये गलती, महाभारत में बताया गया है कारण

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। विशेष रूप से पति-पत्नी के लिए कुछ नियम बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिनका पालन न करने पर जीवन में कलह, तनाव और आर्थिक तंगी तक आ सकती है। आइए जानते हैं, वे नियम क्या हैं?

भोजन न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि यह हमारे मन और घर के वातावरण को भी प्रभावित करता है। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं, जो हमारे पारिवारिक जीवन और सुख-शांति को बनाए रखने में मदद करती हैं। विशेष रूप से पति-पत्नी के लिए कुछ नियम बहुत महत्वपूर्ण माने गए हैं, जिनका पालन न करने पर जीवन में कलह, तनाव और आर्थिक तंगी तक आ सकती है।

एक थाली में भोजन करना क्यों मना है?

आजकल कई लोग आधुनिकता और प्यार जताने के नाम पर पति-पत्नी एक ही थाली में खाना खाते हैं। लेकिन धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह परंपरा गलत मानी जाती है। महाभारत में भीष्म पितामह ने स्वयं पांडवों को यह उपदेश दिया था कि पति-पत्नी को एक ही थाली में भोजन नहीं करना चाहिए।

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महाभारत में बताया गया है ये कारण

महाभारत में इसका कारण यह बताया गया है कि जब पति सिर्फ पत्नी की बातों में ही पूरी तरह रम जाता है और बाकी परिवार की अनदेखी करने लगता है, तो घर में असंतुलन आ जाता है। इससे पारिवारिक रिश्तों में खटास आने लगती है और गृह कलह की शुरुआत होती है। परिणामस्वरूप, घर की सुख-शांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

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खाते वक्त झगड़ने से बचें, वरना

वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, जिन घरों में लगातार झगड़े होते हैं, वहां लक्ष्मी जी का वास नहीं होता। ऐसा घर धीरे-धीरे दरिद्रता की ओर बढ़ता है। इसीलिए यह सलाह दी जाती है कि पति-पत्नी को न केवल एक थाली में खाना खाने से बचना चाहिए, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिल-बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन करना चाहिए।

क्या करें?

इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पति-पत्नी को साथ नहीं बैठना चाहिए। साथ बैठना, प्रेम से खाना और बात करना रिश्तों को मजबूत बनाता है। लेकिन एक ही थाली में खाना, खासतौर पर नियमित रूप से, पारिवारिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन के समय सभी पारिवारिक सदस्य एक साथ बैठना चाहिए। हर सदस्य की उपस्थिति से भोजन का आनंद और महत्व दोनों बढ़ते हैं। भोजन के समय मोबाइल या झगड़ों से दूर रहें। एक-दूसरे का सम्मान करें और हर सदस्य को महत्त्व दें।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Apr 12, 2025 02:41 PM

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About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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