Jagannath Rath Yatra 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 108 कलशों के जल स्नान करेंगे भगवान जगन्नाथ, 15 दिनों तक बंद रहेंगे दर्शन

Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा पर 108 कलश के जल से स्नान करने के बाद 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाएंगे. इस दौरान भक्त को भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर सकेंगे. ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महाअभिषेक के बाद मंदिर के गर्भगृह के द्वार 15 दिनों के लिए बंद कर दिए जाएंगे.

Jagannath Rath Yatra 2026

Photo Credit- News24GFX

Snan Purnima 2026: ओडिशा के पुरी की प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का आरंभ 16 जुलाई 2026 को होगा. रथ यात्रा की शुरुआत से पहले इससे जुड़े कई अनुष्ठान आयोजित किये जाते हैं. साल 2026 में जगन्नाथ पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई से लेकर 24 जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी. इससे पहले भगवान जगन्नाथ, भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा देवी 108 कलशों के जल से स्नान करेंगे.

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ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से अभिषेक किया जाएगा. इस दिन को स्नान पूर्णिमा भी कहते हैं. स्नान पूर्णिमा कल यानी 29 जून 2026 को मनाई जाएगी. पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ स्नान को स्नान करने के बाद बुखार आ जाता है. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो जाते हैं.

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एकांतवास में रहेंगे भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा 15 दिनों के लिए एकांत में रहते हैं इस दौरान मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. भक्तों को स्नान पूर्णिमा के बाद से लेकर अगले 15 दिनों तक भगवान के दर्शन नहीं होंगे. इस दौरान भगवान को विशेष औषधि वाला भोग लगाया जाएगा. पुरी के लोग इस समय को भगवान के आराम का समय मानते हैं. भगवान जगन्नाथ स्वस्थ्य होने के बाद नवयौवन दर्शन देते हैं. इसके बाद प्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा रथ यात्रा के लिए निकलते हैं.

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स्नान पूर्णिमा और 108 कलशों से स्नान का महत्व

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा यानी स्नान पूर्णिमा का दिन बेहद शुभ माना जाता है. स्नान पूर्णिमा के साथ ही ओडिशा के पुरी मंदिर में रथ यात्रा से जुड़े अनुष्ठान की शुरुआत होती है. भगवान जगन्नाथ, भाई बालभद्र और बहन देवी सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है. हिंदू धर्म में 108 को अत्यंत शुभ और पूर्णता का प्रतीक अंक माना जाता है. स्नान के बाद भगवान जह 15 दिनों तक विश्राम करते हैं, तो इसे अनसर काल या अनवसर काल कहा जाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
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