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Religion

Hindu New Year: आज से शुरू हुआ ‘गुरु बृहस्पति’ का शासन, करें ये 5 काम, पूरे साल होगी बरकत

Hindu New Year: 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 का आरंभ चैत्र नवरात्रि के साथ हुआ, जहां देवगुरु बृहस्पति वर्ष के राजा माने गए हैं. नववर्ष के पहले दिन किए गए कार्य सच में पूरे साल सुख-समृद्धि ला सकते हैं. जानिए इस दिन की मान्यताओं का महत्व.

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Written By: Shyamnandan Updated: Mar 19, 2026 08:43
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Hindu New Year: आज से शुरू हुआ ‘गुरु बृहस्पति’ का शासन, करें ये 5 काम, पूरे साल होगी बरकतआज गुरुवार 19 मार्च, 2026 से विक्रम संवत 2083 का नया साल शुरू हो गया है. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से शुरू होने वाला यह वर्ष ज्योतिषीय दृष्टि से खास है. इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति हैं, जो ज्ञान, सुख और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के पहले दिन किए गए कार्य पूरे साल सकारात्मकता और खुशहाली बनाए रखते हैं.

मुख्य द्वार पर वंदनवार और रंगोली

नए साल के स्वागत के लिए सबसे पहले अपने घर के मुख्य द्वार को सजाएं. अशोक या आम के ताजे पत्तों का वंदनवार लगाएं और सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं. सुंदर रंगोली घर के सौंदर्य और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है. यह परंपरा घर में नकारात्मक शक्तियों के प्रवेश को रोकती है और मां लक्ष्मी का स्थायी निवास सुनिश्चित करती है. नए साल के पहले दिन फूलों और दीपक से द्वार सजाना भी शुभ माना जाता है.

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नीम की पत्तियों और मिश्री का सेवन

चैत्र प्रतिपदा को नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री, काली मिर्च और अजवाइन के साथ चबाना एक पुरानी परंपरा है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. इसके अलावा यह प्रतीकात्मक रूप से जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों को समान भाव से स्वीकारने की प्रेरणा देता है. विशेषकर सुबह नीम मिश्री का सेवन मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है.

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ध्वज पूजन और फहराना

घर की छत पर नया धर्म ध्वज फहराना शुभ माना जाता है. इस झंडे पर हनुमान जी या ऊँ का चिन्ह होना चाहिए. यह विजय, यश और आत्मविश्वास का प्रतीक है. ध्वज फहराने से परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास बढ़ता है और पूरे वर्ष मान-सम्मान में वृद्धि होती है. ध्वज के साथ हल्दी और फूलों से पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ती है.

नए पंचांग का श्रवण और दान

नववर्ष के दिन नए साल का पंचांग पढ़ना या सुनना बहुत फलदायी होता है. मंदिर में जाकर ब्राह्मण से ग्रहों और वर्ष के फल जानना चाहिए. इसके साथ अनाज, जल या गुड़ का दान करना पुण्यकारी है. चैत्र मास में जल दान का विशेष महत्व है. प्याऊ लगवाना या पक्षियों के लिए पानी रखना परिवार में सुख और समृद्धि बढ़ाने वाला कार्य माना जाता है.

कलश स्थापना और संकल्प

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करना विशेष महत्व रखता है. शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें और जौ बोएं. इसके साथ अपने जीवन के लिए कोई सकारात्मक संकल्प लें. गुरु बृहस्पति के वर्ष में ज्ञान अर्जित करने या बुराई छोड़ने का संकल्प मानसिक मजबूती और कार्यों में सिद्धि दिलाता है. कलश स्थापना के समय दीपक जलाना और मंत्रोच्चारण करना शुभ फलदायी होता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 19, 2026 08:43 AM

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