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Religion

Darsh Amavasya Upay: साल 2026 की पहली दर्श अमावस्या पर करें ये 3 उपाय, खुश होंगे पितर; बनने लगेंगे अटके हुए काम

Darsh Amavasya 2026 Upay: माघ मास की मौनी अमावस्या साल 2026 की पहली दर्श अमावस्या है, जो 18 और 19 जनवरी दोनों दिन व्याप्त रहेगी. जानिए यह दर्श अमावस्या क्यों खास है और कौन-से 3 विशेष लेकिन सरल उपाय करने से पितर प्रसन्न होंगे और अटके काम भी बनने लगेंगे?

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Written By: Shyamnandan Updated: Jan 18, 2026 15:54
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Darsh Amavasya 2026 Upay: माघ मास की मौनी अमावस्या एक दर्श अमावस्या भी है. हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस दिन चंद्रमा पूरी तरह से दिखाई नहीं देता और आकाश में अंधेरा होता है, उसे ‘अमावस्या’ कहते हैं और जब यह अमावस्या तिथि दो दिनों तक व्याप्त होती है, तो उसके पहले दिन को ‘दर्श अमावस्या’ कहा जाता है. माघ मास की अमावस्या भी एक दर्श अमावस्या है, जो 18 और 19 जनवरी दोनों दिन कायम रहने वाली है. आपको बता दें कि माघ मास की यह अमावस्या वर्ष 2026 की पहली दर्श अमावस्या भी है, जो बेहद फलदायी मानी जा रही है. आइए जानते हैं, इस अवसर पर कौन-से 3 खास उपाय करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अटके काम भी पूरे होने लगते हैं?

करें ये 3 शक्तिशाली उपाय

दर्श अमावस्या की शाम पितरों की ऊर्जा को संतुलित करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सबसे उपयुक्त समय मानी जाती है. यदि आपके काम बार-बार अटक रहे हैं या घर में अशांति रहती है, तो आप यहां बताए गए 3 विशेष और प्रभावी उपाय कर सकते हैं.

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विशेष तिल दीपक जलाएं

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा (South) पितरों की दिशा मानी जाती है. दर्श अमावस्या की शाम को सूर्योदय के बाद घर के दक्षिण कोने में एक मिट्टी का दीपक जलाएं. पक में सरसों का तेल डालें और उसमें थोड़े से काले तिल डाल दें. यह दीपक पितरों के मार्ग को आलोकित करता है. इससे पितर प्रसन्न होकर ‘अतृप्ति’ छोड़ते हैं, जिससे करियर या व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं.

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पीपल के वृक्ष पर ‘मीठा जल और दीप दान’

पीपल के पेड़ में देवताओं के साथ-साथ पितरों का वास माना जाता है. अमावस्या की शाम को किया गया यह उपाय सोए हुए भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. इसके लिए एक लोटे में जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, चीनी और काले तिल मिलाएं. इसे पीपल की जड़ में अर्पित करें. इसके बाद पीपल के नीचे चौमुखी दीपक जलाएं. यदि आपके कानूनी काम या जमीन-जायदाद से जुड़े मामले अटके हुए हैं, तो पितरों के आशीर्वाद से उनमें तेजी आती है.

पक्षियों और कुत्तों के लिए भोजन

दर्श अमावस्या पर पितर सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और किसी भी जीव के रूप में आपका भोग स्वीकार कर सकते हैं. शाम के समय शुद्ध घी में बनी 3 पूरियां लें. एक पर गुड़ रखें (गाय के लिए), दूसरी पर काले तिल (कुत्ते के लिए) और तीसरी के टुकड़े करके छत पर पक्षियों और कौओं के लिए डाल दें. इसे ‘सात्विक बलि’ कहा जाता है. इससे पितृ दोष शांत होता है और घर में अटके हुए मांगलिक कार्य (जैसे विवाह या संतान प्राप्ति) के योग बनने लगते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 18, 2026 03:54 PM

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