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Puja Path ke Niyam: पीरियड्स के दौरान एकादशी व्रत रखें या छोड़ दें? जानिए पूजा-पाठ से जुड़े जरूरी नियम

Puja Path ke Niyam: महिलाओं को पीरियड्स आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आज 7 सितंबर 2026 को अजा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। आइए जानते हैं, क्या पीरियड्स के दौरान भी महिलाएं एकादशी व्रत रख सकती हैं?

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क्या महिलाएं पीरियड्स में व्रत रख सकती हैं? जानें (Photo Credit: AI/News24)

Aja Ekadashi 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल की अजा एकादशी कर व्रत 7 सितंबर, 2026 को यानी आज रखा जा रहा है। अक्सर एकादशी व्रत या अन्य पूजा-पाठ के दौरान महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि क्या इस दौरान पीरियड्स आ जाए तो क्या करें? क्या इस दौरान एकादशी व्रत रख सकते हैं या इससे व्रत खंडित हो जाएगा? वाकई में यह बहुत ही संवेदनशील सवाल है। इसकी वजह यह है एकादशी का व्रत सर्वोच्च पवित्रता की मांग करता है, तो पीरियड यानी मासिक धर्म को लेकर कई कड़े नियम हैं। आइए ज्योतिषाचार्य और पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य से जानते हैं कि इस बारे धर्मशास्त्र क्या कहते हैं?

पवित्रता और विचार

व्रतराज ग्रंथ के अनुसार, मासिक धर्म यानी पीरियड्स आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इस दौरान अपने विचारों को शुद्ध रखना जरूरी है। क्रोध, नेगेटिव थॉट और वाद-विवाद से दूर रहकर भगवान का ध्यान करना चाहिए।

कथा-भजन सुनना

एकादशी व्रती के दौरान, व्रती सीधे तौर पर व्रत कथा नहीं पढ़ सकती हैं, लेकिन मोबाईल, यूट्यूब आदि के जरिए से या किसी दूसरे के पढ़ने-गाने के दौरान एकादशी व्रत की कथा और भजन सुन और देख सकती है।

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मानसिक पूजा

पीरियड्स में प्रत्यक्ष पूजा नहीं करनी चाहिए। इसलिए इस दौरान मानसिक पूजा का खास महत्व है। बिना माला छूए व्रती मन ही मन भगवान विष्णु स्मरण कर सकती हैं और उनके मंत्रों का जाप कर सकती हैं।

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पीरियड्स में ये कार्य हैं वर्जित

मंदिर-पूजा स्थल में प्रवेश: हिन्दू धर्म की मान्यताओं-रिवाजों के अनुसार, पीरियड्स के समय घर के मंदिर या पब्लिक प्लेस के मंदिरों के गर्भगृह में नहीं जाना चाहिए। इस समय प्रत्यक्ष पूजा यानी धूप-दीप जलाने से परहेज करना चाहिए।

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पूजन सामग्री: धर्मग्रंथों और प्रचलित मान्यताओं-रिवाजों के अनुसार, पीरियड्स में भगवान की मूर्ति, विग्रह, चित्र आदि को नहीं छूना चाहिए। तुलसी, पूजा की थाली और अन्य सामग्री का स्पर्श नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा हो जाए, तो क्षमा प्रार्थना कर लेनी चाहिए।

फैमिली मेंबर की हेल्प लें

आपको बता दें कि एकादशी की पूजा और व्रत करने वाले साधक और भक्त व्रत का उपवास रख सकते हैं। किसी विधि के पालन के लिए व्रती लोग अपने परिवार के सदस्यों की हेल्प उस विधान को पूरा कर सकते हैं। इससे पूजा का वहीं फल मिलेगा, जो दूसरे लोगों को मिलता है। इसी प्रकार से आप दान-पुण्य भी कर सकते हैं। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि घर के बड़े-बुजुर्ग को कहें, वह मानें।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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