---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

Aarti Chalisa angle-right

Shri Narayan Kavach Lyrics: рд╢реНрд░реАрд╣рд░рд┐ рд╡рд┐рд╖реНрдгреБ рдХреА рдХреГрдкрд╛ рдкрд╛рдиреЗ рдХреЗ рд▓рд┐рдП рд░реЛрдЬрд╛рдирд╛ рдкрдврд╝реЗрдВ рдирд╛рд░рд╛рдпрдг рдХрд╡рдЪ, рдЬрд╛рдиреЗрдВ рдорд╣рддреНрд╡, рд▓рд┐рд░рд┐рдХреНрд╕, рдирд┐рдпрдо рдФрд░ рд▓рд╛рдн

Narayan Kavach Lyrics: рднрдЧрд╡рд╛рди рд╡рд┐рд╖реНрдгреБ рдХреЛ рдЬрдЧрдд рдХрд╛ рдкрд╛рд▓рдирд╣рд╛рд░ рдорд╛рдирд╛ рдЬрд╛рддрд╛ рд╣реИ, рдЬрд┐рдирдХреА рдХреГрдкрд╛ рд╕реЗ рдХрд▓рдпреБрдЧ рдпрд╛рдиреА рдЖрдЬ рдХреЗ рд╕рдордп рдореЗрдВ рд╣рд░ рд╕рдВрдХрдЯ рд╕реЗ рдореБрдХреНрддрд┐ рдкрд╛рдИ рдЬрд╛ рд╕рдХрддреА рд╣реИ. рдпрджрд┐ рдЖрдк рднреА рд╢реНрд░реАрд╣рд░рд┐ рдХреЛ рдЦреБрд╢ рдХрд░рдирд╛ рдЪрд╛рд╣рддреЗ рд╣реИрдВ рддреЛ рд░реЛрдЬрд╛рдирд╛ рдирд╛рд░рд╛рдпрдг рдХрд╡рдЪ рдХрд╛ рдкрд╛рда рдХрд░ рд╕рдХрддреЗ рд╣реИрдВ. рдЪрд▓рд┐рдП рдЬрд╛рдирддреЗ рд╣реИрдВ рдирд╛рд░рд╛рдпрдг рдХрд╡рдЪ рдХреЗ рдорд╣рддреНрд╡, рд▓рд╛рдн, рдирд┐рдпрдо рдФрд░ рд▓рд┐рд░рд┐рдХреНрд╕ рдЖрджрд┐ рдХреЗ рдмрд╛рд░реЗ рдореЗрдВ.

---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

Shri Narayan Kavach Lyrics: नारायण कवच एक अत्यंत शक्तिशाली दिव्य रक्षा मंत्र है, जो कि श्रीहरि भगवान विष्णु को समर्पित है. इस कवच में 42 श्लोकों का एक समूह है, जिसकी रचना ऋषि विश्वरूप जी ने की थी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि विश्वरूप जी ने असुरों से रक्षा के लिए देवराज इंद्र को नारायण कवच का उपदेश दिया था, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के छठे स्कंध के आठवें अध्याय में मिलता है.

हालांकि, विष्णु जी के भक्त रोजाना भी नारायण कवच का पाठ कर सकते हैं. इससे व्यक्ति की बुरी नजर, शत्रुओं, नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक और शारीरिक बीमारियों से रक्षा होती है. साथ ही सफलता का रास्ता आसान होता है. यहां पर आप नारायण कवच के सही लिरिक्स और नियमों के बारे में पढ़ सकते हैं.

---विज्ञापन---

नारायण कवच

राजोवाच

यया गुप्तः सहस्त्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान्।
क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम् ।।1।।
भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम्।
यथा ततायिनः शत्रून् येन गुप्तोsजयन्मृधे ।।2।।

---विज्ञापन---

श्रीशुक उवाच

वृतः पुरोहितोस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायानुपृच्छते।
नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु।।3।।
विश्वरूप उवाचधौताङ्घ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ् मुखः।
कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः।।4।।
नारायणमयं वर्म संनह्येद् भय आगते।
पादयोर्जानुनोरूर्वोरूदरे हृद्यथोरसि।।5।।
मुखे शिरस्यानुपूर्व्यादोंकारादीनि विन्यसेत्।
ॐ नमो नारायणायेति विपर्ययमथापि वा।।6।।
करन्यासं ततः कुर्याद् द्वादशाक्षरविद्यया।
प्रणवादियकारन्तमङ्गुल्यङ्गुष्ठपर्वसु।।7।।
न्यसेद् हृदय ओङ्कारं विकारमनु मूर्धनि।
षकारं तु भ्रुवोर्मध्ये णकारं शिखया दिशेत्।।8।।
वेकारं नेत्रयोर्युञ्ज्यान्नकारं सर्वसन्धिषु।
मकारमस्त्रमुद्दिश्य मन्त्रमूर्तिर्भवेद् बुधः।।9।।
सविसर्गं फडन्तं तत् सर्वदिक्षु विनिर्दिशेत्।
ॐ विष्णवे नम इति।।10।।
आत्मानं परमं ध्यायेद ध्येयं षट्शक्तिभिर्युतम्।
विद्यातेजस्तपोमूर्तिमिमं मन्त्रमुदाहरेत।।11।।
ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचापाशान् दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः।।12।।
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्य पाशात्।
स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतु विश्वरूपः।।13।।
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः।
विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः।।14।।
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरो वराहः।
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोsव्याद् भरताग्रजोsस्मान्।।15।।
मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्।
दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्।।16।।
सनत्कुमारो वतु कामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्।
देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात्।।17।।
धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा।
यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात् क्रोधवशादहीन्द्रः।।18।।
द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात्।
कल्किः कले कालमलात् प्रपातु धर्मावनायोरूकृतावतारः।।19।।
मां केशवो गदया प्रातरव्याद् गोविन्द आसङ्गवमात्तवेणुः।
नारायण प्राह्ण उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिने विष्णुररीन्द्रपाणिः।।20।।
देवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम्।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतु पद्मनाभः।।21।।
श्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूष ईशोऽसिधरो जनार्दनः।
दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्तिः।।22।।
चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्।
दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः।।23।।
गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि।
कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।।24।।
त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।
दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन्।।25।।
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि।
चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्।।26।।
यन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च।
सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा।।27।।
सर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्।
प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः।।28।।
गरूड़ो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।
रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः।।29।।
सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।
बुद्धिन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः।।30।।
यथा हि भगवानेव वस्तुतः सद्सच्च यत्।
सत्यनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपाद्रवाः।।31।।
यथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्।
भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया।।32।।
तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरिः।
पातु सर्वैः स्वरूपैर्नः सदा सर्वत्र सर्वगः।।33।।
विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्तादन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन ग्रस्तसमस्ततेजाः।।34।।
मघवन्निदमाख्यातं वर्म नारयणात्मकम्।
विजेष्यस्यञ्जसा येन दंशितोऽसुरयूथपान्।।35।।
एतद् धारयमाणस्तु यं यं पश्यति चक्षुषा।
पदा वा संस्पृशेत् सद्यः साध्वसात् स विमुच्यते।।36।।
न कुतश्चित भयं तस्य विद्यां धारयतो भवेत्।
राजदस्युग्रहादिभ्यो व्याघ्रादिभ्यश्च कर्हिचित्।।37।।
इमां विद्यां पुरा कश्चित् कौशिको धारयन् द्विजः।
योगधारणया स्वाङ्गं जहौ स मरूधन्वनि।।38।।
तस्योपरि विमानेन गन्धर्वपतिरेकदा।
ययौ चित्ररथः स्त्रीर्भिवृतो यत्र द्विजक्षयः।।39।।
गगनान्न्यपतत् सद्यः सविमानो ह्यवाक् शिराः।
स वालखिल्यवचनादस्थीन्यादाय विस्मितः।
प्रास्य प्राचीसरस्वत्यां स्नात्वा धाम स्वमन्वगात्।।40।।
य इदं शृणुयात् काले यो धारयति चादृतः।
तं नमस्यन्ति भूतानि मुच्यते सर्वतो भयात्।।41।।
एतां विद्यामधिगतो विश्वरूपाच्छतक्रतुः।
त्रैलोक्यलक्ष्मीं बुभुजे विनिर्जित्यऽमृधेसुरान्।।42।।

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें- Lucky Rashiyan: इन 4 राशियों को मालामाल करेगी मंगल-गुरु की केंद्र दृष्टि, बढ़ेगी बचत और रहेंगे हैप्पी

नारायण कवच के पाठ से जुड़े नियम

  • प्रातः काल में स्नान आदि कार्य करने के बाद ही इसका पाठ करना चाहिए.
  • कवच के पाठ के बीच में किसी से भी बात न करें.
  • कवच का पाठ बीच में न छोड़ें.
  • कवच के पाठ से पहले और बाद में विष्णु जी का स्मरण जरूर करें.
  • पाठ करने के बाद विष्णु जी की आरती जरूर करें.
  • इसका पाठ आसन पर बैठकर ही करना शुभ होता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

---विज्ञापन---

First published on: Mar 28, 2026 01:39 PM

End of Article

About the Author

Nidhi Jain

рдирд┐рдзрд┐ рдХреА рдкрдврд╝рдиреЗ рдФрд░ рд▓рд┐рдЦрдиреЗ рдореЗрдВ рд╣рдореЗрд╢рд╛ рд╕реЗ рд░реБрдЪрд┐ рд░рд╣реА рд╣реИ. рдЗрдиреНрд╣реЛрдВрдиреЗ рдЕрдкрдиреЗ рдХрд░рд┐рдпрд░ рдХреА рд╢реБрд░реБрдЖрдд рдкреНрд░рддрд┐рд╖реНрдард┐рдд рдиреНрдпреВрдЬрдкреЗрдкрд░ рдореЗрдВ рдиреНрдпреВрдЬ рд░рд╛рдЗрдЯрд┐рдВрдЧ рд╕реЗ рдХреА рдереА, рдЬрд┐рд╕рдХреЗ рдмрд╛рдж рджреЗрд╢-рд╡рд┐рджреЗрд╢, рд▓рд╛рдЗрдлрд╕реНрдЯрд╛рдЗрд▓, рдзрд░реНрдо рдФрд░ рдЖрдзреНрдпрд╛рддреНрдорд┐рдХ рд╡рд┐рд╖рдпреЛрдВ рдкрд░ рд╡реНрдпрд╛рдкрдХ рдЕрдзреНрдпрдпрди рдХрд┐рдпрд╛. рдЕрдм рдкрд┐рдЫрд▓реЗ 4 рд╕рд╛рд▓ рд╕реЗ рд╡рд╣ рдбрд┐рдЬрд┐рдЯрд▓ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рд╕реЗ рдЬреБрдбрд╝реА рд╣реБрдИ рд╣реИрдВ. рд╡рд░реНрддрдорд╛рди рдореЗрдВ News24┬ардореЗрдВ┬ардзрд░реНрдо┬ардФрд░┬ардЬреНрдпреЛрддрд┐рд╖┬ард╕реЗрдХреНрд╢рди рдореЗрдВ рдХрд╛рдо рдХрд░ рд░рд╣реА рд╣реИрдВ.

ЁЯУз Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

ЁЯРж Twitter/X: https://x.com/jainidhi125?

Read More

Nidhi Jain

рдирд┐рдзрд┐ рдХреА рдкрдврд╝рдиреЗ рдФрд░ рд▓рд┐рдЦрдиреЗ рдореЗрдВ рд╣рдореЗрд╢рд╛ рд╕реЗ рд░реБрдЪрд┐ рд░рд╣реА рд╣реИ. рдЗрдиреНрд╣реЛрдВрдиреЗ рдЕрдкрдиреЗ рдХрд░рд┐рдпрд░ рдХреА рд╢реБрд░реБрдЖрдд рдкреНрд░рддрд┐рд╖реНрдард┐рдд рдиреНрдпреВрдЬрдкреЗрдкрд░ рдореЗрдВ рдиреНрдпреВрдЬ рд░рд╛рдЗрдЯрд┐рдВрдЧ рд╕реЗ рдХреА рдереА, рдЬрд┐рд╕рдХреЗ рдмрд╛рдж рджреЗрд╢-рд╡рд┐рджреЗрд╢, рд▓рд╛рдЗрдлрд╕реНрдЯрд╛рдЗрд▓, рдзрд░реНрдо рдФрд░ рдЖрдзреНрдпрд╛рддреНрдорд┐рдХ рд╡рд┐рд╖рдпреЛрдВ рдкрд░ рд╡реНрдпрд╛рдкрдХ рдЕрдзреНрдпрдпрди рдХрд┐рдпрд╛. рдЕрдм рдкрд┐рдЫрд▓реЗ 4 рд╕рд╛рд▓ рд╕реЗ рд╡рд╣ рдбрд┐рдЬрд┐рдЯрд▓ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рд╕реЗ рдЬреБрдбрд╝реА рд╣реБрдИ рд╣реИрдВ. рд╡рд░реНрддрдорд╛рди рдореЗрдВ News24┬ардореЗрдВ┬ардзрд░реНрдо┬ардФрд░┬ардЬреНрдпреЛрддрд┐рд╖┬ард╕реЗрдХреНрд╢рди рдореЗрдВ рдХрд╛рдо рдХрд░ рд░рд╣реА рд╣реИрдВ.

ЁЯУз Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

ЁЯРж Twitter/X: https://x.com/jainidhi125?

Read More
---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---
рд╕рдВрдмрдВрдзрд┐рдд рдЦрдмрд░реЗрдВ
Sponsored Links by Taboola