Nautapa 2026: आज 25 मई 2026, वार सोमवार से साल के सबसे गर्म दिन यानी नौतपा की शुरुआत हो गई है. अब आने वाले 9 दिन यानी 2 जून 2026 तक नौतपा चलेगा, जिस दौरान लोगों को चिलचिलाती गर्मी और लू से राहत मिलने की संभावना नहीं है. हालांकि, नौतपा में वरुण देव की पूजा करने की सलाह की जाती है, जो कि जल, वर्षा और समुद्र के देवता हैं. माना जाता है कि वरुण देव की कृपा से व्यक्ति के मन को ठंडक मिलती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है.
यदि आप भी वरुण देव को खुश करना चाहते हैं तो उनके अवतार श्री झूलेलाल को समर्पित चालीसा का पाठ कर सकते हैं. यहां पर श्री झूलेलाल चालीसा के सही लिरिक्स दिए गए हैं.
श्री झूलेलाल की पूजा का महत्व
बता दें कि भगवान झूलेलाल, सिंधी समुदाय के प्रमुख देव व आराध्य हैं, जिनका जन्म प्राचीन काल में धरती पर हुआ था. श्री झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है, जिनकी पूजा करने से मन को शांति व ठंडक मिलती है. साथ ही जल से जुड़े शारीरिक विकार दूर होते हैं. खासकर, श्री झूलेलाल चालीसा का पाठ करके उन्हें खुश किया जा सकता है.
श्री झूलेलाल चालीसा के लिरिक्स
॥ दोहा ॥
जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप।
अमर उदेरो लाल जय, झूलेलाल अनूप॥
॥ चौपाई ॥
रतनलाल रतनाणी नंदन। जयति देवकी सुत जग वन्दन॥
दरियाशाह वरुण अवतारी। जय जय लाल साईं सुखकारी ॥
जय जय होय धर्म की भीरा। जिन्दा पीर हरे जन पीरा॥
संवत दस सौ सात मंझरा। चैत्र शुक्ल द्वितीया भगव वारा॥४॥
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा। प्रभु अवतारे हरे जन कलेशा॥
सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी। मिरखशाह नौप अति अभिमानी॥
कपटी कुटिल क्रूर कुविचारी। यवन मलिनमन अत्याचारी॥
धर्मांतरण करे सब केरा। दुखी हुए जन कष्ट वृंदा॥८॥
पित्वाया हाकिम ढिंढोरा। हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा॥
सिंधी प्रजा बहुत घबराई। इष्ट देव को टेर लगाएं॥
वरुण देव पूजे बहुंभाति। बिन जल अन्न गए दिन राती॥
सिंधी तीर सब दिन चालीसा। घर घर ध्यान लगाये ईशा॥१२॥
गरज उठ नाद सिन्धु सहसा। चारो और उठ नव हर्षा॥
वरुणदेव ने सुनी पुकारा। प्रकटे वरुण मीन आसवारा॥
दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरूपा। कर पुस्तक नवरूप अनुना॥
हर्षित हुए सकल नर नारी। वरुणदेव की महिमा न्यारी॥१६॥
जय जय कारसंभव चाहुँओरा। गयी रात आने को भोर॥
मिरखशाह नौप अत्याचारी। नष्ट हो गयी शक्ति सारी॥
दूर अधर्म, हरण भू भारा। शीघ्र नसरपुर में अवतारा॥
रतनराय रातनानी आँगन। खेलेंगे, आउंगा बच्चा बन॥२०॥
रतनराय घर ख़ुशी आई। झूलेलाल अवतारे सब देय बधाई॥
घर घर मंगल गीत सुहाए। झूलेलाल हरण दुःखे॥
मिर्खशाह तक चर्चा आई। भेजा मंत्री क्रोध दूरा॥
मंत्री ने जब बाल निहारा। धीरज गया हृदय का सारा॥२४॥
देखि मंत्री साईं की लीला। अधिक विचित्र विमोहन शीला॥
बूढ़ा दिखा युवा सेनानी। देखा मंत्री बुद्धि चक्रानी॥
योद्धा रूप दिखे भगवाना। मंत्री हुए विगत अभिमान॥
झूलेलाल दिया आदेश। जा तव नूपति कहोसंदेशा॥२८॥
मिरखशाह नौप ताजे गुमाना। हिन्दू मुस्लिम एक समाना॥
बंद करो नित्य अत्याचार। त्यागो धर्मान्तरण विचारा॥
लेकिन मिर्खशाह अभिमानी। वरुणदेव की बात न मानी॥
एक दिन हो अश्व सवारा। झूलेलाल गये दरबारा॥३२॥
मिर्खशाह नौप ने आज्ञा दी। झूलेलाल बनाओ बंदी॥
किया स्वरूप वरुण का धारण। चारो और हुआ जल प्लावन॥
पठाकी डूबे उतराये। नौप के होश ठिकाने आये॥
फिर तब पड़ा चरण में आई। जय जय धन्य जय साईं॥३६॥
वापस लिया नौपति आदेश। दूर दूर सब जन क्लेशा॥
संवत दस सौ बीस मंझारी। भाद्रशुक्ल चौदस शुभकारी॥
भक्तो की हर आधी व्याधि। जल में ली जलदेव समाधि॥
जो जन धरे आज भी ध्यान। उनका वरुण करे कल्याणा॥४०॥
॥ दोहा ॥
चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय।
पावे मन्वांचित फल अरु जीवन सुखमय होय॥
॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Nautapa 2026: आज 25 मई 2026, वार सोमवार से साल के सबसे गर्म दिन यानी नौतपा की शुरुआत हो गई है. अब आने वाले 9 दिन यानी 2 जून 2026 तक नौतपा चलेगा, जिस दौरान लोगों को चिलचिलाती गर्मी और लू से राहत मिलने की संभावना नहीं है. हालांकि, नौतपा में वरुण देव की पूजा करने की सलाह की जाती है, जो कि जल, वर्षा और समुद्र के देवता हैं. माना जाता है कि वरुण देव की कृपा से व्यक्ति के मन को ठंडक मिलती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है.
यदि आप भी वरुण देव को खुश करना चाहते हैं तो उनके अवतार श्री झूलेलाल को समर्पित चालीसा का पाठ कर सकते हैं. यहां पर श्री झूलेलाल चालीसा के सही लिरिक्स दिए गए हैं.
श्री झूलेलाल की पूजा का महत्व
बता दें कि भगवान झूलेलाल, सिंधी समुदाय के प्रमुख देव व आराध्य हैं, जिनका जन्म प्राचीन काल में धरती पर हुआ था. श्री झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है, जिनकी पूजा करने से मन को शांति व ठंडक मिलती है. साथ ही जल से जुड़े शारीरिक विकार दूर होते हैं. खासकर, श्री झूलेलाल चालीसा का पाठ करके उन्हें खुश किया जा सकता है.
श्री झूलेलाल चालीसा के लिरिक्स
॥ दोहा ॥
जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप।
अमर उदेरो लाल जय, झूलेलाल अनूप॥
॥ चौपाई ॥
रतनलाल रतनाणी नंदन। जयति देवकी सुत जग वन्दन॥
दरियाशाह वरुण अवतारी। जय जय लाल साईं सुखकारी ॥
जय जय होय धर्म की भीरा। जिन्दा पीर हरे जन पीरा॥
संवत दस सौ सात मंझरा। चैत्र शुक्ल द्वितीया भगव वारा॥४॥
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा। प्रभु अवतारे हरे जन कलेशा॥
सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी। मिरखशाह नौप अति अभिमानी॥
कपटी कुटिल क्रूर कुविचारी। यवन मलिनमन अत्याचारी॥
धर्मांतरण करे सब केरा। दुखी हुए जन कष्ट वृंदा॥८॥
पित्वाया हाकिम ढिंढोरा। हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा॥
सिंधी प्रजा बहुत घबराई। इष्ट देव को टेर लगाएं॥
वरुण देव पूजे बहुंभाति। बिन जल अन्न गए दिन राती॥
सिंधी तीर सब दिन चालीसा। घर घर ध्यान लगाये ईशा॥१२॥
गरज उठ नाद सिन्धु सहसा। चारो और उठ नव हर्षा॥
वरुणदेव ने सुनी पुकारा। प्रकटे वरुण मीन आसवारा॥
दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरूपा। कर पुस्तक नवरूप अनुना॥
हर्षित हुए सकल नर नारी। वरुणदेव की महिमा न्यारी॥१६॥
जय जय कारसंभव चाहुँओरा। गयी रात आने को भोर॥
मिरखशाह नौप अत्याचारी। नष्ट हो गयी शक्ति सारी॥
दूर अधर्म, हरण भू भारा। शीघ्र नसरपुर में अवतारा॥
रतनराय रातनानी आँगन। खेलेंगे, आउंगा बच्चा बन॥२०॥
रतनराय घर ख़ुशी आई। झूलेलाल अवतारे सब देय बधाई॥
घर घर मंगल गीत सुहाए। झूलेलाल हरण दुःखे॥
मिर्खशाह तक चर्चा आई। भेजा मंत्री क्रोध दूरा॥
मंत्री ने जब बाल निहारा। धीरज गया हृदय का सारा॥२४॥
देखि मंत्री साईं की लीला। अधिक विचित्र विमोहन शीला॥
बूढ़ा दिखा युवा सेनानी। देखा मंत्री बुद्धि चक्रानी॥
योद्धा रूप दिखे भगवाना। मंत्री हुए विगत अभिमान॥
झूलेलाल दिया आदेश। जा तव नूपति कहोसंदेशा॥२८॥
मिरखशाह नौप ताजे गुमाना। हिन्दू मुस्लिम एक समाना॥
बंद करो नित्य अत्याचार। त्यागो धर्मान्तरण विचारा॥
लेकिन मिर्खशाह अभिमानी। वरुणदेव की बात न मानी॥
एक दिन हो अश्व सवारा। झूलेलाल गये दरबारा॥३२॥
मिर्खशाह नौप ने आज्ञा दी। झूलेलाल बनाओ बंदी॥
किया स्वरूप वरुण का धारण। चारो और हुआ जल प्लावन॥
पठाकी डूबे उतराये। नौप के होश ठिकाने आये॥
फिर तब पड़ा चरण में आई। जय जय धन्य जय साईं॥३६॥
वापस लिया नौपति आदेश। दूर दूर सब जन क्लेशा॥
संवत दस सौ बीस मंझारी। भाद्रशुक्ल चौदस शुभकारी॥
भक्तो की हर आधी व्याधि। जल में ली जलदेव समाधि॥
जो जन धरे आज भी ध्यान। उनका वरुण करे कल्याणा॥४०॥
॥ दोहा ॥
चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय।
पावे मन्वांचित फल अरु जीवन सुखमय होय॥
॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.