Anjan Baba: घने जंगलों में नदी की टापू पर है 'अनजान बाबा' की मजार, जियारत से पूरी होती है मुरादें
Anjan Baba: अनजान बाबा की मजार नदी की तेज धाराओं और घने जंगलों और टापू के बीच है. यहां पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. श्रद्धालु अनजान बाबा के मजार पर अपनी मुराद लेकर पहुंचते हैं. (अमर देव पासवान की रिपोर्ट)

Anjan Baba: अनजान बाबा की मजार भौगोलिक स्थिति के कारण तो खास है. इसके साथ ही इसको लेकर लोगों की गहरी आस्था है. कई श्रद्धालु यहां पिछले 20, 30, 40 और 50 सालों से लगातार आ रहे हैं. यहां उनकी मुरादें पुरी होती हैं.
अनजान बाबा का मजार
2 / 6अनजान बाबा की मजार पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 250 किलोमीटर दूर है. पश्चिम बर्दवान और पुरुलिया जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित अनजान बाबा की मजार है. मजार घने जंगलों और नदी के बीच टापू पर स्थित है.
लोगों के बीच है गहरी आस्था
3 / 6अनजान बाबा की मजार भौगोलिक स्थिति ही खास नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी लोगों की गहरी आस्था भी इसे खास बनाती है. पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां सालों से अपनी हाजिरी लगाने पहुंचते हैं.
वर्षों से लगातार आ रहे हैं श्रद्धालु
4 / 6अनजान बाबा की मजार लोगों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध है. यहां पर कोई 20, 30, 40 या 50 वर्षों से लगातार आ रहा है. श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर, तो कोई मुराद पूरी होने के बाद धन्यवाद करने के लिए आता है.
पूरी होती हैं मुरादें
5 / 6जमुई जिले की रहने वाली बुजुर्ग महिला मीरा देवी और जमुई की रहने वाली रेखा देवी ने बताया कि, यहां आने पर उनकी मुरादें पुरी होती हैं. रेखा देवी अनजान बाबा के मजार पर आईं तो उनके जीवन की समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो गईं.
नदी पार करते पहुंचते हैं श्रद्धालु
6 / 6अनजान बाबा की मजार नदी और घने जंगलों से घिरे स्थान पर है. यह मजार नदी के बीच एक टापू पर है. यहां लोग नाव से नदी पार करके पहुंचते हैं. कई बार नदी में पानी कम होने पर इसे पैदल पार करते हैं. यह मजार करीब 70 से 75 वर्ष पुरानी है. यह मजार धार्मिक आस्था और विश्वास का प्रतीक है. डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.



















