बेबाक...बेधड़क आमिर खान! चर्चा जायज पर आलोचना क्यों?

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और उनकी हिंदू गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट आजकल खूब चर्चा में हैं, लेकिन क्या लोगों का उनकी निजी जिंदगी में दिलचस्पी रखना ठीक है? इस बारे में लोगों से बात की गई ताे अलग-अलग विचार सुनने को मिले। आइए इस लेख में पढ़ते हैं…

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अभिषेक मेहरोत्रा

ग्रुप एडिटर डिजिटल, न्यूज24

पिछले 7 दिन से बॉलीवुड स्टार आमिर खान एक वर्ग के निशाने पर हैं। मुद्दा वो ही हिंदू-मुस्लिम…आमिर खान की तीसरी गर्लफ्रेंड का हिंदू होना कई लोगों को खल रहा है। किसी के निजी जीवन में दखलअंदाजी करना और उसमें मजा तलाशना हिंदुस्तानियों का पुराना शगल है। यह बात आमिर खान को भी भली भांति पता है। अपने करियर में कई बार उन्होंने ट्रोलिंग झेली है। मेला, मंगल पांडे-द राइजिंग, धोबी घाट, ठग्स ऑफ हिंदुस्तान से लेकर लाल सिंह चड्ढा के वक्त उन्होंने देखा, जांचा और परखा कि जब आपका काम आम लोगों की उम्मीदों के अनुरूप न हो तो जबरदस्त निराशा हाथ लगती है। इस बार भी वह कुछ अनयुजूअल कर बैठे हैं। अपने 60वें जन्मदिन पर अपने से कई बरस छोटी लड़की को अपनी नई कम्पेनियन के तौर पर मीडिया के सामने लाए।

आज के समाज में महिला-पुरुष के संबंधों की व्याख्या करने के कई आयाम हैं। ऐसे में अगर कोई शख्स अपनी जीवन की सच्चाइयों से आपको रूबरू करा रहा है तो बेवजह उसकी ट्रोलिंग क्यों? क्या नैतिकता का पैमाना आपकी आंतरिक खुशी का पहरेदार होना चाहिए? यह दोनों सवाल ऐसे हैं, जिसके समर्थन और विरोध में बड़ा वर्ग है।

आमिर खान, उनकी जिंदगी और गर्लफ्रेंड पर छिड़ी चर्चा पर लेख लिखने से पहले करीब 20 लोगों से बात की। तो क्रक्स  ऑफ द स्टोरी (Crux Of The Story) यह रहा कि पुरुष वर्ग जहां इस थॉट पर ओके रहा, वहीं फीमेल फ्रेटरनिटी इसे लस्ट की तरह देख रही हैं। इस दोराहे के बीच लगा कि यह मुद्दा चर्चा का विषय होना चाहिए, जब तक मंथन नहीं होगा, मनभेद मतभेद में नहीं बदलेंगे। मनभेद से मतभेद की ओर जाना भी एक पॉजिटिव साइन ही है। पर अब यह फैसला हर इंडिविजुअल पर छोड़ देते हैं। कई बहस और मुद्दे समाज को अपनी सोच को विस्तृत करने की ओर भी ले जाते हैं। कई बार कोई मुद्दा सामाजिक विश्लेषण के बाद धराशायी भी हो जाता है। लगान, रंग दे बसंती, दिल चाहता है, रंगीला, गुलाम, तारे जमीं पर…इन मूवीज ने आमिर खान की ऐसी इमेज बनाई कि ठग्स ऑफ हिंदुस्तान जैसी कमजोर फिल्में दर्शक पचा नहीं पाए। हमारे देश में कंधों पर चढ़ाने वाले पलभर में नीचे गिराने के लिए भी विख्यात रहे हैं। हालांकि, असल कद्रदान या प्रशंसक इतना मौजूं नहीं होता। पल में माशा, पल में तोला करने वालों की जमात ही अलग होती है और इन्हें ही दूसरों की जिंदगी में झांकने और उस पर प्रतिक्रिया करने का जुनून सवार होता है।

सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक को पिच पर कौन-सा शॉट कब कैसे खेलना चाहिए, यह हर दूसरी चाय की टपरी पर चर्चा का विषय होता है। आमिर की पर्सनल लाइफ उनका निजी नितांत मामला है। वह कितनी शादी करते हैं, कितनी गर्लफ्रेंड बनाते हैं और किस धर्म की लड़की से रिश्ता जोड़ते हैं, इसमें किसी को दिलचस्पी क्यों होनी चाहिए? आमिर भी जानते हैं कि इस देश में ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ बनने वाले बड़ी संख्या में हैं। इसलिए वह उनकी प्रतिक्रियाओं से विचलित नहीं होते। उनके पास उपलब्धियों का पूरा आसमान है। उन्होंने बड़े धैर्य के साथ हिट और दूसरों से अलग फिल्मों की एक-एक कड़ी को जोड़कर सफलता की एक नई परिभाषा गढ़ी है। यहां इस बात का भी जिक्र होना जरूरी है कि जिस शालीनता और सौम्यता से आमिर ने अपने जीवन की नई खुशी को मीडिया से मिलाया, वह उनकी ट्रांसपैरेंसी का ही हिस्सा है। जिस तरह हमारे समाज में उम्र को लेकर भी एक संशय बनाए रखा जाता है, उससे इतर आमिर लगातार अपनी बढ़ती उम्र का जिक्र करते हैं। वह बताते हैं कि ‘रंग के बसंती’ में DJ का कैरेक्टर वे नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उनकी उम्र कॉलेज स्टूडेंट से मैच नहीं होती थी, पर राकेश ओम प्रकाश मेहरा के कन्वेंस करने पर उन्होंने यह रोल किया था।

‘मेला’ वाले आमिर अब ‘धाकड़’ बन चुके हैं। रिटायरमेंट की उम्र पर हैं, पर जोश जज्बा रुक नहीं रहा है। इस सफर में उन्होंने परफेक्शन को बेहद बारीकी से अपने काम का हिस्सा बनाया है। उनकी फिल्मों में ‘कुछ मिस हो गया’ वाला अहसास ही नहीं होता। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी में इस परफेक्शन की कमी जरूर नजर आती है। 2 बार शादी, तलाक और अब फिर शादी की चर्चा। इस सवाल को जन्म देती है कि मिस्टर परफेक्शनिष्ट परफेक्ट प्यार क्यों नहीं ढूंढ पाए? लेकिन इन सबके बावजूद जो बात सुकून और एक अच्छा मेसेज देती है, वह है खान फैमिली की बॉन्डिंग। रीना, जुनैद, इरा, किरण और आजाद आज भी आमिर खान के साथ एन्जॉय करते हैं। हर फंक्शन में पूरे परिवार की मौजूदगी तो यही दर्शाती है कि घर अब भले ही एक न हो, परिवार एक है, प्यार और साथ बरकरार है। इससे ज्यादा और क्या चाहिए? आमिर ‘वैवाहिक सौहार्द’ के दूत हैं, कई बार उन्होंने माना कि वे परिवार के साथ कई मायनों में न्याय नहीं कर पाते हैं, लेकिन रिश्तों की आत्मा को जीवित रखने की उनका कला शायद उस अंतर को भर देती है। यही वजह है कि एक साथ आने वाले फिर खुशी-खुशी अलग हुए और अब भी खुश हैं।

प्यार को धर्म, सनातन से नहीं जोड़ना चाहिए। प्यार में न उम्र की सीमा होती है और न जन्म का बंधन…सिर्फ एक पंक्ति नहीं है। इसमें छिपे गूढ़ अर्थ से अभिभूत होना चाहिए और वैसे भी हम आमिर खान को उनकी पर्सनल लाइफ की वजह से कम और उनके काम की वजह से ज्यादा जानते हैं। मायने यह नहीं रखता कि आमिर ने कितनी शादियां कीं, उनकी तीसरी गर्लफ्रेंड का धर्मं क्या है? मायने यह रखता है कि आमिर अपनी प्रोफेशनल लाइफ में कितने माहिर हैं? क्या उनके फैंस उन्हें पर्सनल लाइफ को एन्जॉय करने के लिए स्पेस देंगे? नहीं भी देंगे तो भी वह अपने अद्भुत काम से आपके दिल में अपने लिए जगह बना ही लेंगे।

(यह लेखक ने निजी विचार हैं)

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Abhishek Mehrotra

Abhishek Mehrotra

अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो हमेशा कुछ नया करने और खुद को समय से आगे रखने में प्रयासरत रहते हैं. प्रिंट मीडिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. बतौर ग्रुप एडिटर डिजिटल News24 से जुड़ने से पहले अभिषेक मेहरोत्रा बिज़नेस वर्ल्ड में डिजिटल एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने Zee मीडिया में डिजिटल एडिटर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है. उनकी लीडरशिप में ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट न केवल लोगों की पसंदीदा वेबसाइट बनी, बल्कि उसने नंबर 1 न्यूज़ वेबसाइट का मुकाम भी हासिल किया. अभिषेक मेहरोत्रा के कार्यकाल में जी न्यूज़ की वेबसाइट ने 100 मिलियन यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अभिषेक मेहरोत्रा ने अपना करियर आगरा के स्वराज्य टाइम्स से जर्नलिज्म की पढाई के दौरान शुरू किया। उसके बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के जरिए अपनी पत्रकारिता की पारी को आगे बढ़ाया। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज्म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ वेब पत्रकारिता शुरू करने वाले अभिषेक का जागरण डॉट कॉम को एक बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम योगदान रहा है। अभिषेक ने काफी पहले ही वेब वर्ल्ड की बारीकियों को समझ लिया था, क्योंकि वह जानते थे कि पत्रकारिता का भविष्य डिजिटल मीडिया में ही निहित है. आज वह अपनी उस समझ, ज्ञान, अनुभव और खबरों को बेहतर ढंग से समझने के कौशल के बल पर पत्रकारिता के स्तंभ को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने 5 सालों तक मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी का दायित्व भी निभाया है. मीडिया जगत और वहां के बिजनेस मॉडल पर उनकी पैनी नजर के चलते वे मीडिया विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खबरों की दुनिया के तमात दबाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के व्यंगकार को जीवित रखा है. उनके लेख अमर उजाला, आउटलुक हिंदी, चौथी दुनिया में बतौर व्यंग्यकार निरंतर प्रकाशित होते है. राज्यसभा डॉट कॉम और दैनिक जागरण के लिए वे विदेशी और समसमायिक मुद्दों पर लिखने वाले स्थापित कॉलमिनिस्ट हैं।
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