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International Women Day 2025: वर्षों से, हिंदी सिनेमा ने हमें ऐसी फिल्में दी हैं जो न सिर्फ मनोरंजन करती हैं बल्कि प्रेरित भी करती हैं और महिलाओं की शक्ति को उजागर करती हैं। ये फिल्में यह साबित करती हैं कि महिलाएं कमजोर नहीं बल्कि अटूट हौसले और साहस की मिसाल हैं। यहां सात ऐसी बॉलीवुड फिल्मों की सूची दी गई है जो पारंपरिक सोच को तोड़ती हैं और महिलाओं के असली ताकतवर रूप को दर्शाती है।
मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित फिल्म फैशन में प्रियंका चोपड़ा ने एक छोटे शहर की लड़की की भूमिका निभाई है, जो मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया में सफलता हासिल करने की कोशिश करती है। कंगना रनौत और मुग्धा गोडसे के दमदार अभिनय से यह फिल्म आत्मसम्मान और सफलता की कीमत को बारीकी से दर्शाती है। फैशन यह दिखाती है कि असली सशक्तिकरण आत्मविश्वास और अपनी सच्चाई को अपनाने में है।
मलयालम फिल्म द ग्रेट इंडियन किचन के रीमेक मिसेज में सान्या मल्होत्रा ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जिसकी दुनिया खाना बनाने, घर संभालने और पति की बेरुखी सहने तक सीमित है। अरति कदव द्वारा निर्देशित यह फिल्म विवाह की सच्चाइयों को उजागर करती है। घरेलू मेहनत और महिलाओं के अनदेखे संघर्षों पर प्रकाश डालने वाली यह फिल्म समाज को महिलाओं के योगदान की वास्तविक अहमियत समझने का संदेश देती है।
इम्तियाज अली की हाईवे आत्मखोज की एक अद्भुत कहानी है। आलिया भट्ट द्वारा निभाया गया वीरा का किरदार, अपहरण के बाद मिली स्वतंत्रता और आंतरिक शक्ति की खोज को दर्शाता है। शानदार प्राकृतिक दृश्यों और एआर रहमान के मनमोहक संगीत के साथ, यह फिल्म यह बताती है कि कभी-कभी खुद को खोजने का सबसे खूबसूरत तरीका मुश्किल परिस्थितियों से गुजरना होता है।
मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित फिल्म चांदनी बार एक युवा लड़की की संघर्ष की यात्रा को दिखाती है, जिसे मुंबई के डांस बार की कड़वी सच्चाइयों का सामना करना पड़ता है। तब्बू के बेहतरीन अभिनय से यह फिल्म महिलाओं के अस्तित्व की लड़ाई को बारीकी से दिखाती है। यह फिल्म सच्चाई को बेबाकी से दिखाने वाली बेहतरीन फिल्मों में से एक है।
यह फिल्म मॉडल जेसिका लाल की हत्या की सच्ची घटना पर आधारित है। रानी मुखर्जी ने एक निडर पत्रकार की भूमिका निभाई है जबकि विद्या बालन जेसिका की बहन सबरीना लाल के किरदार में हैं, जो न्याय के लिए समाज से लड़ती है। नो वन किल्ड जेसिका साहस, सत्य और न्याय की ताकत को बखूबी दर्शाती है।
कंगना रनौत अभिनीत फिल्म क्वीन आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की कहानी है। शादी टूटने के बाद रानी अकेले अपने हनीमून पर निकलती है और इस यात्रा में खुद को नए सिरे से पहचानती है। यह फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी है जो समाज की परवाह किए बिना खुद को चुनती है और साबित करती है कि खुद पर भरोसा करना ही असली जीत है।
राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित फिल्म लज्जा चार महिलाओं – वैदेही, जानकी, मैथिली और रामदुलारी की कहानियों को एक साथ है, जो समाज में अन्याय और शोषण के खिलाफ खड़ी होती हैं। मनीषा कोईराला, माधुरी दीक्षित और रेखा जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों से सजी यह फिल्म महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों की लड़ाई को दर्शाती है।
ये फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं बल्कि महिलाओं की चुनौतियों, जीत और अटूट होंसले की झलक हैं। ये पुरानी रूढ़ियों को तोड़ती हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है।
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