पढ़ाई में कमजोर बच्चों को कैसे पढ़ाएं? यहां जानिए किस तरह बच्चे के लिए पढ़ना बनाएं इंट्रेस्टिंग

How To Make Children Study: अगर आपके बच्चे का भी पढ़ाई में मन नहीं लगता है और वह अक्सर ही पढ़ने में आनाकानी करने लगता है तो यहां जानिए किस तरह बच्चे का पढ़ाई में मन लगाया जा सकता है. आसान से टिप्स आपके बेहद काम आएंगे.

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बच्चों को पढ़ाने के 5 तरीके कौन से हैं?

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Study Tips: बच्चों का अगर पढ़ाई में मन ना लगे तो उन्हें पढ़ने के लिए मनाना बेहद मुश्किल होता है. इससे होता है यह है कि बच्चे स्कूल में जो पढ़ाया गया है उसे समय से सीख और समझ नहीं पाते और अपनी कक्षा के बाकी लोगों से पिछड़ने लगते हैं. इससे बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो जाते हैं और अक्सर ही टीचर की डांट का पात्र बन जाते हैं. लेकिन, माता-पिता अगर कुछ बातों का ध्यान रखें तो बच्चे को पढ़ाई में मन लगाने में मदद कर सकते हैं. अगर बच्चे का पढ़ाई में मन लगने लगेगा तो वह खुद ही अपनी पूरी पढ़ाई (Studies) कर लेगा और कोई उसे पढ़ने में कमजोर नहीं कहेगा. यहां जानिए किन तरीकों से आप बच्चे का पढ़ाई में मन लगा सकते हैं.

बच्चे का पढ़ाई में मन कैसे लगाएं

बनाएं रूटीन

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बच्चे को अगर वक्त-बेवक्त कभी भी पढ़ने के लिए कह दिया जाता है तो इससे बच्चे खीझ उठते हैं. लेकिन, अगर बच्चे का रूटीन बना दिया जाए और एक ही समय पर बच्चे को रोजाना पढ़ने के लिए बिठाया जाए तो उसे पता होता है कि यह समय पढ़ाई है और वह फिजिकली ही नहीं बल्कि मेंटली भी पढ़ने के लिए तैयार होता है.

ब्रेक्स भी दें

बच्चे के सिर पर डंडी लेकर ना खड़े रहें और उसे लगातार एक से डेढ़ घंटे के लिए पढ़ने के लिए ना कहें. बच्चे को हर 15 से 20 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक दें. इससे बच्चे का दिमाग रिफ्रेश होता है और बच्चा मन लगाकर पढ़ पाता है.

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पढ़ाई को फन बनाएं

अगर आप चाहते हैं कि बच्चा रोजाना खुद से मन लगाकर पढ़े तो उसके लिए पढ़ाई फन बनाएं. बच्चे को सिर्फ किताबों में उलझाए रखने के बजाय उसे प्रॉप्स और वीडियो वगैरह दिखाकर पढ़ाएं. उसे रियल लाइफ उदाहरण भी दें. इससे बच्चे के लिए पढ़ाई इंट्रेस्टिंग होने लगती है.

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बच्चे के लर्निंग स्टाइल को समझें

आपको बच्चे का लर्निंग स्टाइल समझना होगा. बच्चे को लिखकर ज्यादा समझ आता है, सुनकर ज्यादा समझ आता है या फिर उसे वीडियो देखकर ज्यादा समझ आता है, यह पता करें. जिस तरह बच्चा ज्यादा अच्छे से सीखता है बच्चे को उसी तरह से सिखाएं.

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नेगेटिव लेबलिंग से बचें

अपने बच्चे को पढ़ाते हुए उसे यह ना कहें कि वह पढ़ाई में कमजोर है या फिर वह बाकी बच्चों से पीछे है, नालायक है या उसे कम समझ आता है. आपको बच्चे का कोंफिडेंस बढ़ाना है जिससे बच्चे का पढ़ने का मन करे और वह अपना बेस्ट देना चाहे. बच्चे का कोंफिडेंस डाउन करने की गलती ना करें.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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