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लाइफस्टाइल

‘मुझे लड़की बनना है…’, हर साल 20–30 साल के 300 युवा चेंज करा रहे जेंडर; चौंका देगी AIIMS की रिपोर्ट

एम्स दिल्ली के ट्रांसजेंडर क्लिनिक में अपनी पहचान बदलने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. आधुनिक मेडिकल तकनीक और हार्मोन थेरेपी के जरिए डॉक्टर अब शरीर को मनचाही सोच के मुताबिक ढाल रहे हैं.

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Written By: Raja Alam Updated: Jan 29, 2026 18:36

दिल्ली स्थित एम्स के ट्रांसजेंडर क्लिनिक में अपनी शारीरिक पहचान बदलने की चाहत रखने वाले मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है. डॉक्टरों के मुताबिक इस क्लिनिक में हर साल लगभग 300 नए मरीज रजिस्टर हो रहे हैं और करीब 600 लोग रेगुलर इलाज के लिए आ रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा संख्या 20 से 30 साल के युवाओं की है. ये वे लोग हैं जो जन्म के समय शारीरिक रूप से सामान्य लड़के या लड़की की तरह पैदा हुए थे, लेकिन बड़े होते ही उन्हें एहसास हुआ कि उनकी सोच और जेंडर पहचान उनके शरीर से मेल नहीं खाती है.

कैसे शुरू होता है इलाज?

एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर राजेश खडगावत बताते हैं कि जेंडर बदलने की प्रक्रिया हार्मोनल इलाज से शुरू होती है. अगर कोई लड़की से लड़का बनना चाहता है, तो उसे पुरुष हार्मोन दिए जाते हैं जिससे चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ आने लगती है और आवाज भारी हो जाती है. वहीं लड़के से लड़की बनने की प्रक्रिया में महिला हार्मोन की मदद से शरीर की बनावट को बदला जाता है. एम्स एक ऐसा संस्थान है जहां एक ही छत के नीचे हार्मोन थेरेपी, मानसिक स्वास्थ्य जांच और सर्जरी जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को कहीं और भटकना नहीं पड़ता है.

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सर्जरी से पहले एक साल तक कड़ी निगरानी

जेंडर बदलने का फैसला केवल शरीर तक सीमित नहीं है, इसके लिए मानसिक मजबूती भी परखी जाती है. साइकेट्री विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप सरन के अनुसार मरीज को कम से कम एक साल तक मॉनिटर किया जाता है. इस दौरान व्यक्ति को उसी जेंडर के रूप में सामाजिक जीवन जीना पड़ता है जिससे वह खुद को जोड़ता है. जब डॉक्टर यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि व्यक्ति की जेंडर पहचान में निरंतरता है और वह मानसिक रूप से तैयार है, तभी उसे बड़ी सर्जरी के लिए सर्टिफिकेट जारी किया जाता है. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रोटोकॉल के तहत होती है.

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आयुष्मान योजना से आसान हुई महंगी सर्जरी

सर्जरी के आखिरी चरण में प्लास्टिक सर्जन अंगों का पुनर्निर्माण करते हैं. इसमें छाती की सर्जरी से लेकर जटिल जननांगों का निर्माण तक शामिल है. प्रोफेसर मनीष सिंघल ने बताया कि ये सर्जरी कई चरणों में पूरी की जाती हैं. राहत की बात यह है कि ये सभी महंगी प्रक्रियाएं अब आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर होती हैं, जिससे ट्रांसजेंडर समुदाय पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है. एम्स दिल्ली अब देश में संवेदनशील और समावेशी ट्रांसजेंडर देखभाल के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां लोगों को नई पहचान और बेहतर जीवन जीने की उम्मीद मिल रही है.

First published on: Jan 29, 2026 06:36 PM

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