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Eid Ul Fitr 2026: सऊदी अरब में भारत से पहले क्यों दिखाई देगा ईद का चांद? जानिए क्या है इसके पीछे की असल वजह

Eid-Ul-Fitr 2026 Moon: अक्सर लोगों का सवाल रहता है कि सऊदी अरब जैसे देशों में ईद भारत से एक दिन पहले क्यों मनाई जाती है? आखिर पूरी दुनिया में एक ही दिन साथ ईद का त्योहार क्यों मनाया नहीं जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी सच्चाई.

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Eid-Ul-Fitr 2026: रमजान का पवित्र महीना खत्म होते ही पूरी दुनिया में ईद-उल-फितर का त्योहार बड़ी खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन रोजा रखने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने और आपसी भाईचारे का संदेश देने का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, हर साल लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि सऊदी अरब में ईद भारत से अक्सर एक दिन पहले क्यों मनाई जाती है. कई लोग इसे सिर्फ परंपरा या धार्मिक तरीका मानते हैं, लेकिन इसके पीछे वजह कुछ और ही है, जिसके बारे में हम आपको बताएंगे.

जानकारी के अनुसार, अलग-अलग जगहों में ईद एक दिन पहले मनाया जाना और बाद में मनाया जाना सबके पीछे भूगोल (Geography), समय का अंतर (Time Zone) और खगोलीय विज्ञान (Astronomy) जैसे महत्वपूर्ण कारण भी होते हैं. चांद दिखने की प्रक्रिया कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति, सूर्य की रोशनी और स्थानीय मौसम पर भी निर्भर करती है. यही वजह है कि अलग-अलग देशों में ईद की तारीख अलग हो सकती है. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर सऊदी अरब जैसे देशों में चांद पहले क्यों नजर आता है और भारत में बाद में क्यों दिखाई देता है.

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क्यों एक दिन पहले मनाया जाता है अरब देशों में ईद? Why is Eid celebrated a day earlier in Arab countries?

सऊदी अरब भारत के पश्चिम दिशा में स्थित है. खगोल विज्ञान के अनुसार नया चांद (हिलाल) सूर्यास्त के बाद सबसे पहले पश्चिमी देशों में दिखाई देने की संभावना ज्यादा होती है. क्योंकि पृथ्वी की गोलाकार बनावट और उसकी गति की वजह से चंद्रमा की स्थिति पश्चिम से पूर्व की ओर बदलती हुई दिखाई देती है. इस वजह से सऊदी अरब में चांद का दिखना भारत की तुलना में कुछ घंटे पहले संभव हो जाता है. यही मुख्य कारण है कि वहां ईद की घोषणा पहले हो जाती है.

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समय का अंतर भी निभाता है अहम भूमिका

भारत और सऊदी अरब के समय में लगभग ढाई घंटे का अंतर है. जब सऊदी अरब में सूर्यास्त के बाद चांद देखने का सही समय होता है, तब भारत में काफी देर हो चुकी होती है. ऐसे में भारत में उसी दिन चांद देख पाना मुश्किल हो जाता है. इसलिए भारत में आमतौर पर अगले दिन शाम को चांद देखने की कोशिश की जाती है. इस समय अंतर के कारण भी दोनों देशों में ईद की तारीख अलग हो जाती है.

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चांद दिखने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझना जरूरी

नए चांद को साफ-साफ देखने के लिए उसकी एक निश्चित ऊंचाई और सूर्य की रोशनी का सही कोण होना जरूरी होता है. कई बार सऊदी अरब में 29 रोजों के बाद ही चांद दिखाई दे जाता है, लेकिन भारत में उसी समय चांद की स्थिति स्पष्ट नहीं होती. जब तक चंद्रमा सही स्थिति में नहीं पहुंचता, तब तक उसे देखना संभव नहीं होता. इसी वजह से भारत में कई बार 30 रोजे पूरे होने के बाद ईद मनाई जाती है.

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धार्मिक कमेटियों का फैसला बहुत जरूरी

चांद दिखने का फैसला सिर्फ विज्ञान पर ही नहीं बल्कि धार्मिक परंपराओं पर भी निर्भर करता है. सऊदी अरब में वहां की आधिकारिक धार्मिक संस्थाएं और सुप्रीम कोर्ट चांद दिखने की पुष्टि के बाद ईद की तारीख घोषित करते हैं. वहीं भारत में विभिन्न शहरों की रुयत-ए-हिलाल कमेटियां स्थानीय गवाहों और मौसम की स्थिति के आधार पर फैसला लेती हैं. यही सपब वजहें हैं, जिस कारण दोनों देशों में चांद देखने का तरीका और ईद के दिन में अंतर देखने को मिलता है, जोकि बहुत सामान्य है.

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बता दें कि सऊदी अरब में ईद-उल-फितर की तारीख 20 मार्च तय की गई है यानी रमजान का पवित्र महीना 30 दिन का था, जिसके बाद ऐसा संभव है कि भारत में ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी.

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First published on: Mar 19, 2026 09:48 AM

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About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधित खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. इससे पहले वह India.com में ट्रेनी के रूप में जुड़े थे, जहां उन्होंने ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखा. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें India News और Khabar Fast जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य संबंधित खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. इससे पहले वह India.com में ट्रेनी के रूप में जुड़े थे, जहां उन्होंने ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखा. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें India News और Khabar Fast जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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