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410 करोड़ रुपए का विदेशी चंदा, जमीन पर कब्जा, फर्जी आंकड़े : ED की रडार पर जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम

ईडी की जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम पर छापेमारी में 410 करोड़ रुपए के विदेशी चंदे का मामला सामने आया है। अब ईडी यह जांचने में लगी है कि यह चंदा किसे और क्यों मिला है और आखिर इसे कहां खर्च किया गया।

महाराष्ट्र में जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम से जुड़े 12 ठिकानों पर मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापे मारे। ट्रस्ट पर पिछले कुछ समय से कथित वित्तीय अनियमितताएं, विदेशी चंदे के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लग रहे हैं। अब जांच में सामने आया है कि कई देशों से इस ट्रस्ट को फंड मिला था। विदेश से मिला यह 410 करोड़ रुपए का चंदा साल 2014 से 2024 के बीच मिला है। ट्रस्ट को बोत्सवाना, यूनाइटेड किंगडम, कुवैत, स्विट्ज़रलैंड से फंड मिला है। इसके अलावा इस लिस्ट में मॉरीशस जैसे कई टैक्स हेवन देश शामिल हैं। ट्रस्ट ने एफसीआरए नियमों का भी उल्लंघन किया है।

कैसे हुआ खुलासा?

ट्रस्ट के नंदुरबार के अक्कलकुवा कैंपस में यमन के दो नागरिक अल खादमी खालेद इब्राहिम शेख और उसकी बीवी अवैध रूप से रह रहे थे। उनकी कुछ गतिविधियों पर पुलिस को शक हुआ। स्थानीय पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए इस मामले में एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान जांच एजेंसियों को शक हुआ कि ट्रस्ट को विदेश स्रोत से बड़ी मात्रा में चंदा मिला है। उन्हें शक हुआ कि इस चंदे के लेनदेन के दौरान एफसीआरए का उल्लंघन किया गया है। इसके बाद 15 जुलाई 2024 को गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। जांच में सामने आया था कि ट्रस्ट ने विदेशी दान को गैर-पंजीकृत एनजीओ को भेजा था।

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यह भी पढ़ें: ईडी का बड़ा एक्शन, 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापे, झारखंड-बंगाल में अवैध कोयला कारोबार पर बड़ी कार्रवाई

क्या-क्या आरोप?

जांच के दौरान कई संदिग्ध गतिविधियां देखने को मिली। ट्रस्ट एक अल-सलाम नाम का अस्पताल चलाता है। इसको लेकर आरोप हैं कि इस अस्पताल ने गैर कानूनी कब्जा कर रखा है। इसके साथ ही इसमें कई प्रशासनिक चूक भी सामने आई हैं। यह भी आरोप है कि अस्पताल या कॉलेज में मरीजों और छात्रों का आंकड़ा फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। मरीजों की संख्या को वास्तविक संख्या से कहीं ज्यादा दिखाया गया, जिससे सरकारी अनुदान, परमिशन, और दूसरे फायदे उठाये जा सकें।

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ट्रस्ट पर आदिवासी जमीन को “विस्तार के नाम पर” अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप भी है। यह मामला अक्कलकुवा इलाके में भूमि अलॉटमेंट से जुड़ा है।

अब आगे क्या कार्रवाई?

ED की छापेमारी और जांच, एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर हुई है। चार्जशीट अप्रैल 2025 में अक्कलकुवा पुलिस स्टेशन ने दाखिल की थी। ईडी इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मान रही है। ईडी ये जांच रही है कि विदेशी दान किन बैंक अकाउंट में किस ट्रस्ट और संबंधित व्यक्तियों ने किसलिए और कब लिया था। साथ ही यह भी जांच होगी कि जो फंड मिला, उसको कैसे खर्च किया गया। इसके साथ ही, ट्रस्ट द्वारा विदेशी धन के दुरुपयोग को लेकर (FEMA) या अन्य प्रावधानों के उल्लंघन का मामला भी बन सकता है। ईडी की कार्रवाई अभी जारी है, अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, और ना ही कोई आरोप तय हुए हैं। छापेमारी में डॉक्युमेंट्स और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।

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क्या है जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम?

जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम साल 1979 में स्थापित किया गया। यह एक इस्लामी वेलफेयर और शैक्षणिक संस्थान है। इसके कई स्कूल, कॉलेज, मेडिकल/फार्मेसी कॉलेज, अस्पताल चलते हैं। ट्रस्ट का दावा है कि वह शिक्षा और स्वास्थ्य के जरिए समाज कल्याण करता है। इस ट्रस्ट के शैक्षणिक संस्थानों में करीब 15 हजार छात्र पढ़ते हैं। इस ट्रस्ट पर कुछ नेताओं ने भी धर्मांतरण, अवैध घुसपैठ या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों का आरोप लगाया था।

First published on: Dec 02, 2025 01:38 PM

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Indrajeet Singh

इंद्रजीत सिंह पिछले 25 साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्यरत हैं, इस समय न्यूज24 में महाराष्ट्र के ब्यूरो चीफ़ और एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं, इसके पहले इंद्रजीत सिंह इन टाईम न्यूज,
एनडीटीवी, इंडिया न्यूज, टीवी9 जैसे कई चैनल में काम कर चुके हैं, इंद्रजीत सिंह इस समय न्यूज24 मुंबई में एजेंसी, बिज़नेस और पॉलिटिकल खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं।

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Arif Khan

इंद्रजीत सिंह पिछले 25 साल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्यरत हैं, इस समय न्यूज24 में महाराष्ट्र के ब्यूरो चीफ़ और एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं, इसके पहले इंद्रजीत सिंह इन टाईम न्यूज,
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