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असम में बाढ़ की क्या है वजह? जलवायु परिवर्तन या कुछ और, इस साल हालात कुछ ज्यादा ही खराब

हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए छतों पर रहना पड़ रहा है. केंद्र और राज्य सरकार लोगों की हर संभव मदद कर रही है, कई एनजीओ और हस्तियों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है.

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भारत के कई राज्यों में मानसून के चलते मूसलाधार बारिश और जलभराव की खबरें सामने आ रही हैं. बीते शुक्रवार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में बारिश ने पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. आसमान में पूरे दिन बादल छाए रहे और सुबह से शुरू हुई बारिश में रात तक रुकने का नाम नहीं लिया. इस बीच असम से रोजाना बाढ़ की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनसे जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के गुस्से का अंदाजा लगाया जा सकता है. असम में बाढ़ से अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि डेढ़ लाख से अधिक आबादी प्रभावित है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि असम इस साल बाढ़ से इतना परेशान क्यों है?

असम में बाढ़ की क्या है वजह?


ऐसा नहीं है कि यह पहला साल है जब असम में बाढ़ से हालात इतने खराब हैं. असम का भूगोल, जलवायु और यहां की नदियों के कारण हर वर्ष बाढ़ की स्थिति बनी रहती है. असम की प्रमुख ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष नदी के आस-पास के इलाके पानी में डूब जाते हैं. एक समय ऐसा था जब असम के ऊपरी इलाकों में रहने वाले जिले निवासी चराईदेव, जोरहाट, शिवसागर और गोलाघाट बाढ़ की चपेट से सुरक्षित रहते थे, लेकिन इस वर्ष इन जिलों में भी पानी घुसने से लोग परेशान हैं.

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पिछले 60 वर्षों में हालात सबसे ज्यादा खराब


हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए छतों पर रहना पड़ रहा है. केंद्र और राज्य सरकार लोगों की हर संभव मदद कर रही है, कई एनजीओ और हस्तियों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है. असम सरकार ने विधानसभा में खुद माना है कि पिछले 60 वर्षों में हालात इतने ज्यादा खराब नहीं हुए थे. मौसम विभाग का कहना है कि असम में बाढ़ की वजह बादल फटना नहीं, बल्कि ऊपरी असम और पड़ोसी राज्य नागालैंड में हो रही लगातार बारिश है. हालांकि इसमें असम की भौगोलिक स्थिति ने भी अहम योगदान दिया है.

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असम अपने आस-पड़ोस में पर्वतीय राज्यों से घिरा हुआ है. साथ ही यहां ब्रह्मपुत्र और बराक घाटियों से बहने वाली ये दोनों नदियां उस समय उफान पर आ जाती है, जब बारिश की वजह से इनकी 120 सहायक नदियों में ऊपरी इलाकों से पानी के साथ गाद और पत्थर दोनों नदियों में मिल जाते हैं. ये स्थिति हालात और भी गंभीर बना देती है.

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क्या बाढ़ को रोका जा सकता है?


21वीं सदी में तकनीक लगातार बदल रही है और समय के साथ उन्नत हो रही है. हालांकि अभी तक इंसान इतना ताकतवर नहीं हुआ कि वो प्रकृति से टक्कर ले सके. जहां तक बाढ़ की बात करें तो असम में बाढ़ को पूरी तरह रोकना असंभव है, जिसकी सबसे बड़ी वजह ब्रह्मपुत्र नदी है. ब्रह्मपुत्र भले ही असम में प्रलय का कारण बनती है, लेकिन यही नहीं राज्य को उन्नत और उपजाऊ भी बनाती है. इसके अलावा काजीरंगा नेशनल पार्क, खेती और मछली के लिए भी ये नदी बहुत महत्वपूर्ण है. बाढ़ तो कंट्रोल होना संभव नहीं है, लेकिन जल निकासी व्यवस्था, तटीय इलाकों में निर्माण पर रोक और तटबंधों को मजबूत करने से इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है.

First published on: Aug 08, 2026 07:27 AM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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