ट्रैफिक सिग्नल रात में क्यों हो जाते हैं बंद, क्या इस समय लागू नहीं होते यातायात नियम?

रात में 10 बजे के बाद अक्सर ट्रैफिक सिग्नल बंद हो जाते हैं और सिर्फ पील बत्ती ब्लिंक कर रही होती है. तो क्या रात के समय ट्रैफिक रूल्स फॉलो करना जरूरी है, तो इसका जवाब है हां. आइए जानते इस नियम की पूरी डिटेल्स.

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ट्रैफिक सिग्नल रात में क्यों हो जाते हैं बंद, क्या इस समय लागू नहीं होते यातायात नियम?

रात के करीब 10 बजे हैं. दिनभर ट्रैफिक से भरा रहने वाला चौराहा अब लगभग खाली है. आप कार लेकर सिग्नल पर पुहंचे हैं तो देखते हें कि लाल और हरी बत्ती की जह सिर्फ पीली लाइट लगातार ब्लिंक कर रही है. ऐसे में मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर रात में ट्रैफिक सिग्नल ऐसा क्यों करते हैं? क्या इस समय ट्रैफिक नियम भी बदल जाते हैं या फिर बिना रुके चौराह पार किया जा सकता है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल आते हैं, तो इसका जबाव यहां समझते हैं.

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रात में सिग्नल क्यों बदल जाता है मोड?

शहरों के कई प्रमुख चौराहों पर रात के समय ट्रैफिक सिग्नल को फ्लैशिंग मोड में डाल दिया जाता है. आमतौर पर रात करीब 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाल या हरी बत्तियों की जगह पीली बत्ती ब्लिंक करती दिखाई दे सकती है. इसका मुख्य कारण रात में सड़कों पर कम होने वाला ट्रैफिक है. दिन के समय जहां लगातार वाहनों की आवाजाही रहती है, वहीं देर रात सड़कें काफी खाली हो जाती हैं.

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खाली सड़क पर बेवजह नहीं रुकना पड़ता

अगर रात में भी दिन की तरह 60 से 90 सेकंड का लाल सिग्नल चलता रहे तो खाली सड़क पर भी वाहन चालकों को अनावश्यक रूप से रुकना पड़ेगा. इससे समय की बर्बादी के साथ गाड़ियों के फ्यूल की खपत भी बढ़ सकती है. इसी वजह से कम ट्रैफिक वाले समय में सिग्नल को फ्लैशिंग मोड पर रखा जाता है. पीली बत्ती के ब्लिंक करने का मतलब है कि चौराहे पर तय टाइमर के हिसाब से से ट्रैफिक नहीं चल रहा है लेकिन चालक को सावधानी के साथ आगे बढ़ना है.

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क्या रात में ट्रैफिक नियम खत्म हो जाते हैं?

ये सबसे बड़ी गलतफहमी है. सिग्नल के फ्लैशिंग मोड में जाने का मतलब ये नहीं है कि रात में ट्रैफिक नियम लागू नहीं होते. अगर पीली बत्ती ब्लिंक कर रही है तो चालक को अपनी स्पीड कम करनी चाहिए और चौराहे को पार करने से पहले दोनों तरफ से आने वाले वाहनों को देखना चाहिए. 

रात में भी कट सकता है चालान

रात में सड़क खाली देखकर तेज स्पीड में गाड़ी चलाना भारी पड़ सकता है. कई जगह चौराहों और सड़को पर लगे ऑटोमैटिक कैमरे स्पीड और ट्रैफिक नियमों की निगरानी करते हैं. अगर कोई चालक ओवरस्पीडिंग करता है या खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाता है तो कैमरे के जरिए उसका ई चालान जारी हो सकता है.इसलिए यह सोचना गलत है कि रात में सड़क खाली होने पर स्पीड लिमिट की चिंता करने की जरूरत नहीं है.

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रात में चौराहा पार करते समय रहें सावधान

रात के समय सड़क पर वाहनों की संख्या कम जरूरी होती है, लेकिन तेज रफ्तार और कम सतर्कता के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में ब्लिंक करती पीली बत्ती को रास्ता साफ होने का संकेत न समझे. चौराहे के पास स्पीड कम करें, दोनों तरफ देखें और तभी आगे बढ़ें. याद रखें, रात में सिग्नल का मोड बदल सकता है, लेकिन आपकी जिम्मेदारी और ट्रैफिक नियम खत्म नहीं होते.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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