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किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक 2026 के दूसरे दिन बैलगाड़ी दौड़ से गूंज उठा मैदान

Kila Raipur Rural Olympics 2026 के दूसरे दिन 12 साल बाद ऐतिहासिक बैलगाड़ी दौड़ों की वापसी से मैदान उत्साह से गूंज उठा. Kultar Singh Sandhwan और Baltej Pannu ने इसे पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण खेलों के पुनर्जीवन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया.

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किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक के दूसरे दिन उत्साह का एक अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला, हजारों लोग, खासकर युवा, पंजाब की समृद्ध ग्रामीण खेल विरासत का जश्न मनाने के लिए ऐतिहासिक स्टेडियम किला रायपुर में एकत्र हुए.

दूसरे दिन की खेलों ने दर्शकों के मन को मोह लिया क्योंकि ऐतिहासिक बैलगाड़ी दौड़ें 12 साल के अंतराल के बाद पुनर्जीवित हुईं हैं, जो दर्शकों का ध्यान का केंद्र बनी. स्टेडियम में बैठे दर्शकों/लोगों ने जोरदार जयकारों की गूंज के साथ पारंपरिक बैलगाड़ी दौड़ों का स्वागत किया. दर्शकों ने न केवल बैलगाड़ी दौड़ों का उत्साह से समर्थन किया बल्कि पारंपरिक खेलों और एथलेटिक मुकाबलों की एक जीवंत श्रृंखला का भी समर्थन किया. जिसमें हॉकी मैच, कबड्डी मुकाबले, शॉट पुट थ्रो, 100 मीटर स्प्रिंट, टग ऑफ वॉर मुकाबले, लंबी छलांग के मुकाबले, बाजीगर शो और कई अन्य ग्रामीण एथलेटिक खेल शामिल थे. खेल मैदान परिवारों, किसानों, युवा समूहों, राज्य और बाहर के दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था, जिससे एकता, उत्साह और भाईचारे की भावना का एक अलग ही माहौल पैदा हुआ.

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पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उत्साही दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि बैलगाड़ी दौड़ें फिर से शुरू होना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है. यह उपलब्धि पंजाब पशु क्रूरता निवारण (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025 में दर्ज सोच-समझकर किए गए विधायी सुधारों और पशुओं की भलाई एवं सुरक्षा के माध्यम से संभव हुई. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पारंपरिक खेल की वापसी न केवल पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखती है बल्कि युवा पीढ़ी में पारंपरिक ग्रामीण खेलों के लिए नया उत्साह भी जगाती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ये खेल युवाओं को खेल के मैदानों की ओर वापस खींचेंगे और उन्हें नशों तथा अत्यधिक मोबाइल उपयोग से दूर रखेंगे. उन्होंने इन खेलों से लोगों के गहरे भावनात्मक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि ये खेल पंजाब की संस्कृति, विरासत को जीवंत और बनाए रखने में सहायता करते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम युवाओं को इन परंपराओं से फिर से जोड़ें, खासकर ऐसे समय में जब रील संस्कृति और डिजिटल भटकाव ने उन्हें असली पंजाबी जड़ों से दूर कर दिया है.

इससे पहले दिन में पंजाब सरकार के स्टेट मीडिया हेड श्री बलतेज पन्नू ने आयोजकों और दर्शकों की बड़ी संख्या में भागीदारी की प्रशंसा की, जिससे इन खेलों को एक शानदार सफलता में बदल दिया गया. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे बैलगाड़ी दौड़ों की फिर से शुरुआत ने पूरे पंजाब में एक ताजा खेल भावना भर दी है, जिससे ग्रामीण जोश और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में ग्रामीण ओलंपिक किला रायपुर की शान को बहाल किया गया है. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विजन के तहत, हमने पिछली चुनौतियों को पार करके इन शानदार खेलों को सही सुरक्षा प्रबंधों के साथ वापस लाया है और आज लोगों के चेहरों पर खुशी देखकर पता लगता है कि यह कोशिश सराहनीय है.”

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इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) अमरजीत बैंस, एस.डी.एम लुधियाना पूर्वी जसलीन कौर भुल्लर, एस.डी.एम उपिंदरजीत कौर बराड़, सहायक कमिश्नर डॉ. प्रगति वर्मा, जिला खेल अधिकारी कुलदीप चुघ और अन्य व्यक्तित्व तथा बड़ी संख्या में दर्शक शामिल थे.

First published on: Feb 19, 2026 10:42 AM

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