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नेपाल में कहां से होकर गुजरती है कैलाश मानसरोवर यात्रा? अचानक आई बाढ़ के बाद 400 तीर्थ यात्री लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह से 133 भारतीयों समेत 400 यात्री लापता हैं. ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे

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नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह से त्राहिमाम मचा है. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 133 भारतीयों समेत 400 यात्री लापता हैं. ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे कि तभी फ्लैश फ्लड के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. आपको बता दें कि बुधवार को 390 तीर्थयात्री बॉर्डर पार करने वाले थे, जिसमें 93 नेपाली समेत अलग-अलग देशों के लोग शामिल थे. दरअसल, भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के तीन खास रूट हैं. एक रूट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से होकर गुजरता है, एक रूट सिक्किम के नाथु ला पास से है. इन दोनों रूट पर भारत सरकार यात्रा करवाती है. एक तीसरा रूट, नेपाल से होकर गुजरता है. इस रास्ते से यात्रा करने के लिए ट्रैवल एजेंट्स की जरूरत पड़ती है.

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नेपाल से होकर जाने वाले रूट्स

नेपाल के रास्ते जो कैलाश मानसरोवर यात्रा की जाती है, वो भारत सरकार की ऑफिशियल यात्रा से काफी अलग है. यहां से प्राइवेट टूर ऑपरेटर ट्रैवलर्स को तिब्बत ले जाते हैं. इसमें एक रूट रसुवागढ़ी-केरुंग है, जिसमें काठमांडू-स्याफ्रुबेसी-टिमुरे-रसुवागढ़ी-केरुंग/ग्यिरोंग-सागा-मानसरोवर-दारचेन-कैलाश शामिल है. नेपाल-तिब्बत बॉर्डर यहीं से क्रॉस किया जाता है. दूसरा रूट है हिल्सा-यारी रूट. नेपाल से कैलाश जाने का दूसरा अहम रास्ता पश्चिमी नेपाल से होकर गुजरता है. इस रूट में काठमांडू-नेपालगंज-सिमिकोट-हिल्सा-यारी बॉर्डर-पुरांग/तक्लाकोट-मानसरोवर-दारचेन-कैलाश है. पहले हवाई यात्रा के ज़रिए नेपालगंज और सिमिकोट तक जाना पड़ता है, उसके बाद हिल्सा और वहां से नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पार करके चीन के तिब्बत इलाके में एंट्री होती है.

कैसे आई बाढ़?

जानकारी के मुताबिक, तिब्बत में ग्लेशियर फटने की वजह से भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का लेवल बढ़ गया जिसने आसपास बसे इलाकों में सड़कें, पुल, मकान और बिजली परियोजनाओं को तहस-नहस कर दिया. बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, आशंका जताई जा रही है कि इस त्रासदी की चपेट में कई लोग आए हैं. अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है. राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. भारत के बिहार और पूर्वी यूपी में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. पीएम मोदी ने खुद नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की और हालात का जायज़ा लिया. बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रासुवा जिले में देखने को मिला है. तिब्बत की सीमा से लगे टिमुरे और स्याफ्रुबेंसी इलाके में पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. कई वाहन, सामान और इमारतें पानी में बह गईं. नदी पर बना एक हाल में तैयार पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया. रासुवा के अलावा नुवाकोट और धादिंग जिलों में भी बाढ़ का असर पहुंचा है.

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First published on: Aug 26, 2026 07:26 PM

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