नेपाल की प्रचंड बाढ़ ने याद दिला दी केदारनाथ त्रासदी, 2013 की 'प्रलय' में 5000 से अधिक लोगों की गई जान; आज भी कई मृतक गुमनाम

Nepal floods: नेपाल के गंडकी नदी में तिब्बत स्थित एक ग्लेशियर के फटने से अचानक बाढ़ आई, उसी तरह 16 जून, 2013 में केदारनाथ हादसे के पीछे भी चैराबाड़ी ग्लेशियर का फटना एक बड़ी वजह थी.

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नेपाल के गंडकी और कोशी नदी में तिब्बत स्थित एक ग्लेशियर के फटने से अचानक बाढ़ आई. (Photo: X)

नेपाल में बुधवार को गंडकी और कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तहस-नहस कर दिया. सोशल मीडिया पर नेपाल से कई भयावह वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें देखकर भारत के लोगों को 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में आई त्रासदी याद आई गई. नेपाल में आई बाढ़ में से अब तक 1000 लोगों के प्रभावित होने की आशंका है, प्राप्त जानकारी के मुताबिक कई भारतीय टूरिस्ट भी लापता है. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नदी के किनारे बसे घर पानी की धारा में ताश के पत्तों की तरह ढह गए.

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मलबे के नीचे दफ्न हुई इमारतें

अपने पीछे मलबा छोड़ गई गंडकी और कोशी नदी ने केदारनाथ हादसे के पीड़ितों के जख्म को एक बार फिर से कुरेद दिया. सोशल मीडिया पर नेपाल से कुछ ऐसे ही क्लिप्स सामने आए हैं, जिस तरह सा 2013 में केदारनाथ त्रासदी के समय इंटरनेट पर सामने आ रहे थे. आपको जानकर हैरानी होगी कि गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार केदारनाथ हादसे में 5000 से 6000 लोग की मौत हुई थी. दैनिक भाष्कर की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 702 मृतक ऐसे हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है.

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नेपाल और केदारनाथ हादसे में कॉमन क्या?

नेपाल और केदारनाथ हादसे में एक बात कॉमन है कि नदियों में अचानक आई बाढ़ की वजह ग्लेशियर का फटना था. नेपाल के गंडकी और कोशी नदी में तिब्बत स्थित एक ग्लेशियर के फटने से अचानक बाढ़ आई, उसी तरह 16 जून, 2013 में केदारनाथ हादसे के पीछे भी चैराबाड़ी ग्लेशियर का फटना एक बड़ी वजह थी. केदारनाथ धाम के अलावा उत्तराखंड का चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी भी इस बाढ़ की चपेट में आया. नदियों में सिलेंडर से लेकर लोगों की लाशें बहती नजर आईं. मंजर इतना भयानक था कि देखने वाले लोग आज भी उस दृष्य को भुला नहीं सके हैं.

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क्यों फटते हैं ग्लेशियर?

ग्लेशियर के ‘फटने’ को वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है. असल में ग्लेशियर खुद किसी गुब्बारे की तरह नहीं फटता, बल्कि उसके पास या उसके ऊपर बनी बर्फ या चट्टानों से घिरी झील का पानी अचानक बाहर निकल जाता है, जिससे बहुत तेज बाढ़ आती है. तापमान बढ़ने पर ग्लेशियर तेजी से पिघलता है. इससे ग्लेशियर के आसपास या उसके सामने पानी जमा होकर बड़ी झील बना सकता है. ऐसी झीलों को अक्सर बर्फ, मलबा और चट्टानें रोककर रखती हैं. यह प्राकृतिक बांध कमजोर हो जाए तो पानी अचानक बाहर निकल जाता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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