धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है, लेकिन इस पद पर काम करते हुए उनकी राह आसान नहीं होगी, बल्कि उनके रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां हैं. सबसे बड़ी चुनौती नीट पेपर लीक के कारण शिक्षा मंत्री के पद पर लगे दाग को मिटाना और नई शिक्षा नीति को असरदार तरीके से मजबूती से लागू करना होगा. पिछले साल से अब तक CBSE आंसर शीट, NEET पेपर लीक, NCERT की किताबों को लेकर उठे विवादों का निपटारा करना होगा.

कितनी संपत्ति के मालिक हैं प्रह्लाद जोशी, शिक्षा मंत्री पद की ज़िम्मेदारी मिलते ही क्या बोले?

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धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय तक शिक्षा मंत्री रहे

मोदी सरकार के 12 सालों के कार्यकाल में कई मंत्री शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद पर सबसे लंबे समय तक काम किया. धर्मेंद्र प्रधान 1845 दिन शिक्षा मंत्री रहे. वहीं प्रकाश जावड़ेकर 1059 दिन, स्मृति ईरानी 771 दिन और रमेश पोखरियाल निशंक 769 दिन तक शिक्षा मंत्री के पद पर रहे. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में केंद्र सरकार की सबसे ज्यादा किरकिरी हुई. केंद्र सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा.

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पेपर लीक ओर NTA में बदलाव बड़ा चैलेंज

शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा संभालते हुए प्रह्लाद जोशी के सामने अहम चुनौती एंट्रेस और रिक्रूटमेंट एग्जाम पेपर को लीक होने से रोकना है. CBSE, NCERT की वर्किंग में भी कई बदलाव लाने होंगे. सिलेबस बदलने होंगे और शिक्षण संस्थानों की प्रशासनिक प्रक्रिया को कसना होगा. एंट्रेस और रिक्रूटमेंट एग्जाम को फुलप्रूफ और धांधली से मुक्त बनाने के लिए NTA का ढांचा पूरी तरह बदलना होगा. अगले साल नीट एग्जाम CBT मोड में कराया जाना है तो उसके लिए स्टूडेंट्स का फीडबैक लेकर उस पर काम करना होगा.

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पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून का प्रस्ताव

प्रह्लाद जोशी के सामने एक चैलेंज मानसून सत्र में पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित बिल को पास कराने का होगा. केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 में संशोधन करके पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट मीटिंग में मंजूर किया है. इस प्रस्ताव को सोमवार को मानसून सत्र में पेश किया जाना है.

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इसके तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की जांच तेजी से करने, सुनवाई समय पर करने, सख्त सजा-जुर्माना, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), 2 महीने में जांच पूरी करने, स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई और 3 महीने के अंदर हाई कोर्ट द्वारा अपीलों का निपटारा करने का प्रावधान किया गया है.

पेपर लीक कराने वाले पूरे गिरोह या रैकेट के लिए 10 साल तक की जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान संशोधित बिल में किा गया है. यह विधेयक केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेंश करेंगे और इसे पास कराने के लिए शिक्षा मंत्री को पापड़ बेलने पड़ेंगे.