Explainer: संसद में सांसदों को लेकर क्या हैं नियम, क्यों किए जाते निलंबित और क्या-कितनी मिलती है सजा‌?

Parliament Budget Session 2026: संसद सत्रों के दौरान दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों के लिए कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है. वहीं अगर इन नियमों का उल्लंघन हो जाए तो सांसदों को निलंबन की सजा मिलती है, जैसे हाल ही में बजट सत्र के दौरान 8 सांसदों को निलंबित किया गया.

Lok Sabha Session

कांग्रेस सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है.

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Rules For Parliament Members: दिल्ली में संसद का बजट सत्र चल रहा है और पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण हुआ, जिस पर चर्चा के लिए 3 दिन 3-4-5 फरवरी तय किए गए. पहले दिन 3 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी स्पीच शुरू की, लेकिन चीन-डोकलाम का जिक्र होने के कारण BJP सांसदों ने विरोध किया. स्पीकर ओम बिड़ला ने भी राहुल गांधी को बोलने से रोका. फिर BJP-कांग्रेस सांसदों का हंगामा बढ़ता चला गया. कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी को बोलने न देने का आरोप लगाया और वेल में आकर वे नारेबाजी करने लगे.

नियम उल्लंघन मामले में निलंबित हुए 8 सांसद

विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी को दौरान कांग्रेस सांसदों ने नाराजगी जताते हुए कागज फाड़कर चेयर की तरफ उछाल दिए, जिसे सदन और चेयर की गरिमा का उल्लंघन माना गया और 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांसद होने के नाते नेताओं को संसद के प्रति कुछ नियमों का पालन करना होता है. अगर वे इन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें सजा भी हो सकती है. संविधान के तहत कुछ धाराओं में संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए नियम बनाए गए हैं, जिनके बारे में उन्हें सांसद बनते ही बता दिया जाता है.

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दोनों सदनों में सांसदों के लिए तय हैं ये नियम

बता दें कि सांसदों के लिए एक नियमावली बनाई गई है, जिसका पालन उन्हें सदन के दौरान करना होता है, लेकिन उल्लंघन करने पर सजा भी मिलती है. ज्यादातर मामलों में सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया जाता है. नियमों के अनुसार, सांसदों का सबसे पहला कर्तव्य संसद के दोनों सदनों की मर्यादा, अनुशासन बनाए रखना और दोनों सदनों का संचालन सुचारू रूप से चलाए रखना होता है, लेकिन अकसर सांसद किसी मुद्दे पर विवाद के चलते ऐसा नहीं कर पाते हैं.

बता दें कि लोकसभा में नियम 349 में कुल 23 प्रावधान किए गए हैं, जिनके अनुसार सदन की कार्यवाही के दौरान सांसद कोई किताब जिसका सदन से संबंध नहीं, न्यूजपेपर-मैग्जीन या डॉक्यूमेंट नहीं पढ़ सकते. जब कोई सदन में अपनी बात रख रहा हो तो सांसद बीच में बोलकर बाधा नहीं डाल सकते. किसी भी तरह का शोर नहीं मचा सकते. कोई फोटो या पोस्टर नहीं दिखा सकते. नारेबाजी करना, वेल में आना, कागज फाड़कर उछालना भी सदन की गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना जाता है.

नियम उल्लंघन पर सांसदों को क्या सजा मिलती?

बता दें कि दोनों सदनों में कार्यवाही के दौरान सांसद अगर दुव्यर्वहार या गलत आचरण करते हैं तो नियम 373 के तहत लोकसभा स्पीकर उक्त सांसद को सदन से बाहर निकाल सकते हैं. अगर सांसद स्पीकर का आदेश नहीं मानते और सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हैं तो नियम 374 के तहत स्पीकर उन्हें निलंबित कर सकते हैं.

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नियम 374(2) के तहत सांसदों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया जा सकता है. इसी तरह की स्थितियों में राज्यसभा सभापति नियम 255 और 256 के तहत सांसदों को निलंबित कर सकते हैं या सदन से निकाल सकते हैं. वहीं निलंबित होने के बाद सांसद न तो सदन में आ सकते हैं और न ही प्रश्न पूछ सकते हैं, न वोट डाल सकते हैं और न ही बहस में शामिल हो सकते हैं.

सदनों में सांसदों की अटेंडेंस के लिए ये है नियम

बता दें कि सत्र के दौरान सांसदों के लिए सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है. साल 2026 से लोकसभा में बायोमीट्रिक अटेंडेंस शुरू हो गई है. अब सदन के बाहर रजिस्टर में एंट्री करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बायोमीट्रिक एंट्री भी करनी होगी. वहीं अगर सांसद समय पर नहीं आते और सदन की कार्यवाही शुरू होकर खत्म हो जाए तो सांसद को ऐबसेंट माना जाएगा और वेतन-भत्ते में कटौती हो सकती है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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