गौतम अदाणी के बेटे करण अदाणी ने बताया कि कैसे उनके पिता गौतम अदाणी ने भारी दबाव के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और देश-निर्माण पर अपना ध्यान बनाए रखा. करण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट में कहा कि जब उनका परिवार दुख के दौर से गुजर रहा था, तो उस अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल था. उन्होंने कहा कि इसे देखने के दो नजरिए थे, एक तो एक बिजनेसमैन के तौर पर यह देखना कि कैसे एक संस्था बेहद ज्यादा दबाव का सामना कर रही थी, और दूसरा एक बेटे के तौर पर यह देखना कि कैसे उनके पिता ने उस मुश्किल दौर को संभाला.

'पिता को कड़ी मेहनत करते देखा'

करण ने बताया कि अक्सर उनकी नींद अपने पिता से जुड़ी नई हेडलाइंस, आरोपों और लोगों की राय सुनकर खुलती थी. उन्होंने माना कि कभी-कभी उन्हें दुख और गुस्सा आता था और वे सोचते थे कि एक इंसान कितना दबाव झेल सकता है. हालांकि, उनके मन में लोगों की बातों या शोर-शराबे के बजाय अपने पिता की दिनचर्या की बात ज्यादा रही.

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करण के मुताबिक, गौतम अदाणी हर सुबह उठते थे और अपने काम पर ध्यान देते थे. प्रोजेक्ट्स पूरे करने थे, कर्मचारी और दूसरे स्टेकहोल्डर्स ग्रुप पर निर्भर थे, पोर्ट्स का कामकाज जारी रखना था, घरों और बिजनेस तक बिजली पहुंचानी थी और एयरपोर्ट्स को यात्रियों की सेवा करनी थी.

करण ने इसे मुश्किल हालात में डटे रहने का एक अलग तरीका बताया. हर आलोचना का जवाब देने के बजाय, उनके पिता ने काम करते रहने का रास्ता चुना.

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'काम ज्यादा जरूरी था'

करण ने कहा कि उन्होंने जो सबसे बड़ी सीख ली, उनमें से एक यह थी कि मुश्किल समय में हमेशा सबके सामने प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं होती. उन्हें याद है कि दबाव के बावजूद, उनके पिता ने अपना ध्यान बनाए रखा और अपने आस-पास के लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करते रहे. करण के लिए, यह लीडरशिप और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता के बारे में एक जरूरी निजी सीख बन गई.

उन्होंने कहा कि भारत आगे बढ़ता रहा और अदाणी ग्रुप अपने प्रोजेक्ट्स पर काम करता रहा.

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'पिता को देखने का नजरिया बदल गया'

करण ने कहा कि पिछले तीन वर्षों ने उनके पिता को देखने का उनका नजरिया भी बदल दिया और उन्हें यह बेहतर ढंग से समझने में मदद की कि गौतम अदाणी ने अपना करियर इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने में क्यों बिताया है.

उन्होंने कहा कि उनके पिता का लंबे समय से यह मानना ​​रहा है कि भारत की भविष्य की उम्मीदों को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी. करण के मुताबिक, पोर्ट, एयरपोर्ट, बिजली और अन्य प्रोजेक्ट्स सिर्फ बिजनेस नहीं था, बल्कि भारत के विकास के एक बड़े विजन का हिस्सा था.

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करण ने कहा कि इस सोच ने उनके पिता के कई बड़े फैसलों को प्रभावित किया है. उन्होंने आगे कहा कि इस नजरिए को करीब से देखने से उन्हें देश के भविष्य के निर्माण के प्रति अपने पिता की प्रतिबद्धता को और गहराई से समझने में मदद मिली.

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