7 लाख भारतीयों की टेंशन बढ़ी! अप्रवासियों पर डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान से जानें अमेरिका में कैसे हालात?

Donald Trump Illegal Immigration Decision: डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध अप्रवासियों के खिलाफ जो फैसला लिया है, उसने करीब 7 लाख भारतीयों की टेंशन बढ़ा दी है। वहीं अमेरिका में रह रहे अप्रवासी अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगे हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका में अब हालात कैसे हैं?

Donald Trump

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Trump Order Against Illegal Immigrants Tension: अमेरिका का 47वां राष्ट्रपति बनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने कई बड़े और कड़े फैसले लिए। सबसे बड़ा फैसला अप्रवासियों के खिलाफ लिया गया है। ट्रंप ने एक ऑर्डर साइन करके ऐलान किया है कि अमेरिका में बिना कागजों और लीगल डॉक्यूमेंट के रहने वाले अप्रवासियों को उनके देश भेजा जाएगा।

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ट्रंप ने जहां बिना दस्तावेजों के देश में रहने वाले दूसरे देशों के लोगों पर एक्शन लेने का फैसला लिया है, वहीं ट्रंप ने अमेरिका में जन्मजात नागरिकता को लेकर भी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। इस ऑर्डर के बाद अब अमेरिका में पैदा होने वाले हर बच्चे को जन्मजात नागरिकता नहीं दी जाएगी। अमेरिका में इस समय करीब 725000 अनडॉक्यूमेंटेड इंडियंस हैं, जो फ्लोरिडा, टेक्सास, न्यूयॉर्क, और न्यू जर्सी में रह रहे हैं। ट्रंप के आदेशों ने इन भारतीयों की टेंशन बढ़ा दी है।

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स्कूलों में बच्चों को भेजने से डर रहे अप्रवासी

HT की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ही नहीं, अमेरिका में रहने वाले अलग-अलग देशों के लाखों लोगों निर्वासन को लेकर चिंतित हैं। चूंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे आप्रवासियों पर नकेल कस रहे हैं, इसलिए कुछ परिवार इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित है? कई शहरों में शिक्षकों ने अप्रवासी माता-पिता को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि स्कूल उनके बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए डर तब और बढ़ गया, जब मंगलवार को ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की कि वह इमिग्रेशन एजेंसियों को स्कूलों, चर्चों और अस्पतालों में अप्रवासी लोगों को गिरफ्तार करने की अनुमति देगा, जिससे 2011 से लागू नीति समाप्त हो जाएगी।

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मैक्सिको से आई कारमेन ने यह सुनने के बाद कहा कि हे भगवान! मैं सोच भी नहीं सकती कि वे ऐसा क्यों करेंगे? वह अपने 6 और 4 साल के 2 पोते-पोतियों को लेकर सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र स्थित उनके स्कूल में पहुंचीं और कहा कि स्कूल प्रशासन हमारे साथ और उसने वादा किया है कि अगर इमिग्रेशन एजेंसी से अधिकारी आए तो वह उन्हें कन्वेंस करेंगे और अगर बच्चे स्कूल में सुरक्षित नहीं होंगे तो वह परिवार को सूचित करेंगे। कई स्कूलों ने मीडिया को बताया कि उन्हें चिंतित अभिभावकों के फोन आ रहे हैं, जिनमें कहा गया है कि इमिग्रेशन एजेंट स्कूलों में घुसने की कोशिश करेंगे तो वे क्या करेंगे?

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कई स्कूल प्रशासन अप्रवासियों के समर्थक

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अधिकारी ने कहा कि अप्रवासी अब गिरफ्तारी से बचने के लिए अमेरिका के स्कूलों और चर्चों में छिप नहीं पाएंगे। वहीं देश की राजधानी में डीसी बाइलिंगुअल पब्लिक चार्टर स्कूल की प्रमुख डेनिएला एनेलो ने कहा कि वह ट्रंप की इस घोषणा से स्तब्ध हैं। किसी को छिपाने जैसी कोई बात नहीं है। ऐसा नहीं होता, ऐसा नहीं हुआ है। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार, अनुमान है कि 733000 स्कूली बच्चे अवैध रूप से अमेरिका में हैं। इनमें से कई के पास अमेरिकी नागरिकता है, लेकिन उनके माता-पिता अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं।

कुछ राज्यों और जिलों में शिक्षा अधिकारियों ने अप्रवासी छात्रों के लिए खड़े होने की कसम खाई है। नवंबर में शिकागो पब्लिक स्कूल्स बोर्ड ऑफ एजुकेशन द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया था कि स्कूल इमिग्रेशन एक्ट को लागू करने में ICE की सहायता नहीं करेंगे। अगर संघीय एजेंट शिकागो के 633 स्कूलों में से किसी में भी आते हैं तो उन्हें एक वैध अदालती या न्यायिक आदेश प्रस्तुत करना होगा।

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बोस्टन में रहने वाली आइरिस गोंजालेज के लिए स्कूल ही एकमात्र सुरक्षित जगह है, क्योंकि वह देश में अवैध रूप से रह रही हैं। बोस्टन के स्कूलों में उसके बच्चे करीब 10 साल से पढ़ रहे हैं और उसे उम्मीद नहीं है कि कोई भी उसे या उसकी बेटियों को यह साबित करने के लिए परेशान करेगा कि वे वैध रूप से यहां हैं। इसलिए उसके बच्चे स्कूल जाते रहेंगे।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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