मिडिल ईस्ट में फरवरी 2026 से छिड़ी जंग का सबसे बड़ा असर हवाई यात्राओं और भारतीय एयरलाइंस पर पड़ा है. क्योंकि भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में 26 प्रतिशत की गिरावट आई और विदेशी एयरलाइंस के यात्रियों की संख्या बढ़ी है. अप्रैल-जून की तिमाही के आंकड़े सामने आए हैं, जिसके अनुसार भारत आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में 10.5% की गिरावट आई और संख्या घटकर 1.7 करोड़ रह गई. इससे एयरलाइंस का भारी आर्थिक नुकसान हुआ.
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क्या कहते हैं DGCA के आंकड़े?
DGCA के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में 26 प्रतिशत की गिरावट आई है. एअर इंडिया ग्रुप (एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस) के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 35 प्रतिशत की गिरावट आई है. पिछले साल जून 2025 में हुए अहमदाबाद विमान हादसे के बाद विदेशी उड़ानों में आई कटौती भी यात्रियों की संख्या में गिरावट का एक कारण है. इंडिगो के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 15.4% घटकर 33.4 लाख रह गई, पिछले साल संख्या 39.5 लाख थी.
क्या है विदेशी एयरलाइंस की स्थिति?
बता दें कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एमिरेट्स एयरलाइंस में आने-जाने वाले भारतीयों की संख्या 7 प्रतिशत बढ़कर 14.8 लाख हो गई है. एतिहाद एयरलाइंस को मामूली नुकसान हुआ, लेकिन लुफ्थांसा, स्विस और ब्रिटिश एयरवेज जैसी कई पश्चिमी कंपनियों ने भारतीय उड़ानों की संख्या बढ़ाई. लुफ्थांसा के यात्री 3.7 लाख और ब्रिटिश एयरवेज के 2.9 लाख से ज्यादा हो गए. पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद होने से भी भारतीय कंपनियों खासकर एअर इंडिया और इंडिगो को भारी नुकसान हुआ है.
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कब से जारी है अमेरिका-ईरान युद्ध?
बता दें कि मिडिल ईस्ट में फरवरी 2026 से जंग जारी है. पहले मैदानी जंग में अमेरिका-इजरायल और ईरान उतरे. इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया. ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागीं, वहीं अरब देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला करके नुकसान पहुंचाया. ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जंग लड़ी जा रही है. इजरायल पीछे हट गया है, लेकिन ईरान-अमेरिका मैदान में अड़े हैं और अब विवाद परमाणु हथियारों से हटकर होर्मुज स्ट्रेट बन गया है.