ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी संघर्ष को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है. ईरान के खिलाफ 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसके बाद से अब तक मिडिल ईस्ट में शांति बहाल नहीं हो सकती है. ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल को कई गहरे जख्म दिए, जिसे डोनाल्ड ट्रंप पचा नहीं पा रहे हैं. अब ईरान को आर्थिक मोर्च पर घेरने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत कई कड़े प्रावधान लगाए जा सकते हैं. साथ ही ट्रंप ने ईरान की मदद करने वाले देशों को भी कड़ी चेतावनी दी है.
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मदद करने वाले देशों को भी चेतावनी
ईरान को कड़े आर्थिक प्रावधानों की चेतावनी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझौते का मौका दिया गया था, जिसे उसने ठुकरा दिया. इसके बदले में अब नया आर्थिक युद्ध शुरू किया जाएगा. ट्रंप ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत अब तेल तस्करी, स्वैप लाइन्स, नकद हस्तांतरण और फ्रंट कंपनियों पर तत्काल रोक लगाई जाएगी. कोई भी देश वित्तीय संस्थाओं, कारोबारों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से ईरान को मदद देगा, उसे भारी आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे.
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क्या शुरू हो सकती है बातचीत?
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं बना पायेगा. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी जरूर कहा कि भविष्य में बातचीत फिर से शुरू हो सकती है, लेकिन तेहरान को पहले समझौता करने के लिए तैयार रहना होगा. डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी के बीच ईरान ने भी अमेरिका को फिर से लाल आंख दिखाई है. ईरान संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने तीखे शब्दों में कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को तब तक नहीं खोलेगा, जब तक कि अमेरिका 14 मांगों वाले ज्ञापन को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर लेता.