आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को दशकों बाद एक बार फिर से धमकाया है और लेटर भेजकर धमकी दी गई है. लेटर भी नाम के साथ पते पर भेजे गए हैं. लेटर में कश्मीरी पंडितों के मकान नंबरों और गली नंबरों तक का जिक्र किया गया है. पूरे नाम-पते के साथ डिटेल में स्टैम्प वगैरा लगाकर लेटर भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई है, यानी आतंकियों ने बिना किसी डर के सरेआम कश्मीरी पंडितों को धमकाया है और बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है.
‘मुसलमान बनो या कश्मीर छोड़ो’; ऐसा क्या हुआ था 34 साल पहले? जो भागना पड़ा था कश्मीरी पंडितों को
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आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को गद्दार कहा
आतंकियों ने लेटर में लिखा है कि कश्मीरी पंडित गद्दार हैं और दिल्ली में बैठे सरकार में शामिल अपने मालिकों के कहने पर, उनके इशारे पर काम कर रहे हैं. जो कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर को छोड़कर नहीं गए थे, वे अपने आप को सुरक्षित समझें. लेकिन जो कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर छोड़कर चले गए हैं, वे RSS एजेंट बन गए हैं और RSS का एजेंडा चला रहे हैं. पहले भी चेतावनी दी थी, ध्यान रहे कि कश्मीरी पंडितों की हर हरकत पर हमारी नजर है.
यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा लेटर
कश्मीर पुलिस और प्रशासन अधिकारियों का कहना है कि लेटर में अहमद बिलाल नामक शख्स के साइन हैं. 2 लेटर भेजे गए हैं, लेकिन किसने और कहां से भेजे हैं? इसका सुराग अभी तक नहीं मिला है, जल्दी पता लगा लेंगे. प्राथमिक जांच के अनुसार, लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा है, लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी है. जो कश्मीरी पंडितों को धमकाकर डरा रहा है. अब से पहले भी कश्मीरी पंडितों को धमकी भरे लेटर भेजे गए थे, जिनमें फोन नंबर लिखे थे.
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कौन हैं कश्मीरी पंडित, क्यों किया पलायन?
कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी के मूल निवासी हैं और हिंदू समुदाय के लोग हैं, जो सारस्वत ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. 1990 के दशक में आतंकवाद और हिंसा के कारण लाखों कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से पलायन करना पड़ा था. कश्मीर घाटी से पलायन के बाद कश्मीरी पंडित जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य शहरों में जाकर बस गए थे. आज भी लाखों कश्मीरी पंडित निर्वासितों की जिंदगी जी रहे हैं और कश्मीर वापस आने के नाम तक से डरते हैं.
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