जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मोहम्मद ज़फर को ATS ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से गिरफ्तार किया, जिसके बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं. शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि वो पश्चिमी यूपी के कई मदरसों से अपना नेटवर्क ऑपरेट करता था. जांच में पता चला है कि ज़फर ने पाकिस्तान के एक फोन नंबर पर क्रिप्टो करेंसी में मनी ट्रांसफर किया था. जिहाद के लिए मदरसों से चंदे के तौर पर जुटाई गई रकम को लेकर गहराई से जांच की जा रही है. एटीएस ने उसे सोमवार को लखनऊ के स्पेशल कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद उसे जेल भेजा गया है.
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मसूद अज़हर से जुड़े हैं तार
ATS को जानकारी मिली थी कि पश्चिमी यूपी में एक संदिग्ध एक्टिव है और वो मदरसे के नाम पर चंदा इकट्ठा करके पाकिस्तान को फंडिंग दे रहा है, जिसके बाद इस मामले की तफ्तीश शुरू की गई. एटीएस को ये भी टिप मिली थी कि चंदे के पैसे जैश-ए-मुहम्मद से जुड़े लोगों को भी भेजे गए थे. जांच में सामने आया कि ये फंडिंग जैश-ए-मुहम्मद के चीफ मसूद अजहर के कहने पर की जा रही थी और ज़फर आतंकी अज़हर के बयानों को लोगों तक पहुंचाकर हिंसक जिहाद को भड़का रहा था.
क्या था प्लान?
ATS की जांच में पता चला है कि बिहार के पूर्णिया के रहने वाले मोहम्मद जफर ने पहले मेरठ में रहकर एक मदरसे से तालीम ली. जब एटीएस ने ज़फर का सोशल मीडिया खंगाला तो पता चला कि वो जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अज़हर की भड़काऊ और जिहादी तस्वीरें शेयर कर कट्टरपंथियों को जिहाद के लिए उकसा रहा था. मेरठ में ज़फर का आना-जाना लगा रहता था और पिछले कुछ वक्त से वो हापुड़ और बाकी शहरों में जगह बदल-बदल कर रह रहा था.
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