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‘मर्दों से ज्यादा काम करती हैं महिलाएं…’, मैटरनिटी लीव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं और गोद लेने वाली महिलाओं को मैटरनिटी लीव से वंचित करना गलत है. कोर्ट ने पुराने नियम को असंवैधानिक बताते हुए बड़ा फैसला सुनाया.

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चों की मां को भी 12 हफ्तों की छुट्टी मिलना अनिवार्य है, फिर चाहे बच्चे की उम्र कितनी भी हो. इस दौरान कोर्ट ने ये कहा है कि कामकाजी महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में ज्यादा घंटे काम करती हैं. दरअसल, एक कानूनी नियम में ये कहा गया था कि सिर्फ वही महिलाएं मैटरनिटी लीव की हकदार होंगी, जो तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लें. सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि ये नियम भेदभावपूर्ण है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली HC ने केजरीवाल, सिसोदिया को पक्ष रखने के लिए दिया समय, CBI की याचिका पर हुई सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि मां बनने का अधिकार सिर्फ बायोलॉजिकल तक सीमित नहीं है. गोद लेने वाली महिलाओं भी समान रूप से बच्चे की देखभाल करती हैं और उन्हें भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलना चाहिए. इस दौरान कोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चे की उम्र के आधार पर मैटरनिटी लीव देने से इनकार करना सही नहीं है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के काम के बोझ पर भी अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि महिलाएं ऑफिस के काम के अलावा घर और परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं, जिससे उनके कुल काम का समय पुरुषों से ज्यादा हो जाता है. इस तरह महिलाओं के अनपेड काम को भी मान्यता देना जरूरी है.

ये महिलाओं की गरिमा से जुड़ा है- SC

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि मैटरनिटी लीव सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार है, जो उनकी गरिमा, समानता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में मैटरनिटी लीव को संवैधानिक अधिकार बता चुका है. इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. खासकर उन महिलाओं के लिए जो गोद लेकर मां बनती हैं, अब उन्हें भी बराबरी का दर्जा और सुविधाएं मिलेंगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये फैसला ना सिर्फ महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय को भी बढ़ावा देगा.

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ये भी पढ़ें: ‘कानून बनाया तो कोई महिलाओं को नौकरी नहीं देगा’, पेड पीरियड लीव पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार

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First published on: Mar 17, 2026 11:47 PM

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About the Author

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जो पिछले 9 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। वर्तमान में वर्षा News24 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रही हैं। यहां ये नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि खबरें करती हैं। इससे पहले वर्षा आज तक, ज़ी न्यूज, रिपब्लिक, इंडिया टीवी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम कर चुकी हैं। वर्षा ने बतौर रिपोर्टर और एंकर भी काम किया है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ वर्षा को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग खबरों का भी बखूबी अनुभव है। खबरों के अलावा वर्षा कहानियां और कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं।

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वर्षा सिकरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जो पिछले 9 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। वर्तमान में वर्षा News24 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रही हैं। यहां ये नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि खबरें करती हैं। इससे पहले वर्षा आज तक, ज़ी न्यूज, रिपब्लिक, इंडिया टीवी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम कर चुकी हैं। वर्षा ने बतौर रिपोर्टर और एंकर भी काम किया है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ वर्षा को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग खबरों का भी बखूबी अनुभव है। खबरों के अलावा वर्षा कहानियां और कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं।

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