40 साल बाद भी मर्डर केस पर नहीं हुई सुनवाई, अब सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा एक्शन

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हत्या के एक मामले की अपील के निपटारे में 40 साल से ज्यादा की देरी पर गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि न्याय में इतनी लंबी देरी सिस्टम पर सवाल खड़े करती है और लंबित मामलों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

Supreme Court Questions 40-Year Delay in Allahabad HC Murder Appeal

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित एक हत्या मामले की अपील पर फैसला आने में चार दशक से ज्यादा समय लगने पर गहरी नाराजगी जताई है. अदालत ने इस मामले को भारतीय न्याय व्यवस्था में बढ़ते लंबित मामलों की गंभीर समस्या का उदाहरण बताते हुए इसके समाधान के लिए सुझाव और ठोस एक्शन की मांग की है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने कहा कि किसी व्यक्ति को न्याय पाने के लिए 40 साल तक इंतजार करना बेहद चिंताजनक है. अदालत ने सवाल उठाया कि अगर अपीलों का निपटारा इतनी लंबे वक्त तक नहीं हो पाता है तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है.

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क्या है पूरा मामला?

मामला एक हत्या के केस से जुड़ा है जिसमें आरोपी को साल 1983 में गिरफ्तार किया गया था. विजय सिंह नामक शख्स को नवंबर 1983 में अपने भाई की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, उस समय उनकी उम्र 28 साल थी. कानपुर की एक सेशंस कोर्ट ने दिसंबर 1985 में विजय सिंह को हत्या का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई. सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी. हालांकि, उनकी अपील लगभग 41 साल तक लंबित रही और आखिरकार 9 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट ने 20 पन्नों के फैसले के जरिए इसे खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि सिंह ने हिरासत में सिर्फ तीन महीने बिताए थे और अपनी अपील के नतीजे का इंतजार करते हुए लगभग 43 साल तक जमानत पर रहे थे. कोर्ट ने कार्यवाही चलने के दौरान उसकी जमानत जारी रखने का फैसला किया.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में मामलों के निपटारे में होने वाली लंबी देरी की समस्या पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ज्यादा पेंडेंसी की वजह से मुकदमेबाज अक्सर जल्द सुनवाई के निर्देश पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं. जस्टिस मिश्रा ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे और एडवोकेट जोहेब हुसैन से पुराने मामलों के निपटारे में तेजी लाने के संभावित उपायों पर सुझाव मांगे. मिस्टर दवे ने सुझाव दिया कि तीन दशकों से ज्यादा समय से लंबित प्रॉसिक्यूशन अपीलों को खारिज करके बैकलॉग को कम किया जा सकता है. हालांकि, बेंच ने इस विचार को खारिज कर दिया और कहा कि न्याय करने के बुनियादी सिद्धांत सिर्फ लंबे समय से लंबित मामलों को खारिज करने की इजाजत नहीं देते हैं. बेंच ने चेतावनी दी कि इस तरह के रवैये से जनहित पर बुरा असर पड़ सकता है और पक्षों को अपना पक्ष रखने के मौके से वंचित किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील में, सिंह ने मामले में हुई लंबी देरी का जिक्र करते हुए कहा कि वो अब 72 साल के हो चुके हैं और उन्होंने अपनी जवानी, अधेड़ उम्र और बुढ़ापा एक क्रिमिनल के तौर पर बिताया है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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