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बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पति ने कहा- DNA परीक्षण से ही साबित होगी पत्नी की बेवफाई 

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक मांग रहे बच्चे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. यह फैसला तलाक के दौरान बच्चे को लेकर उठे सवालों के बाद सुनाया गया. कोर्ट ने कहा कि बच्चे की पहचान करने के लिए अब कोर्ट पैटरनिटी टेस्ट भी करवा सकता है. 

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Supreme Court Paternity Test Allowed: शादीशुदा जिंदगी में कई तरह के उतार चढ़ाव आते हैं. कई बार तलाक की नौबत भी आ जाती है और इस दौरान बच्चे को लेकर भी कई तरह के सवाल उठने लगते हैं. हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. वैसे शादी के दौरान पैदा हुए बच्चे को वैध माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा है कि फिर भी बच्चे का पैटरनिटी टेस्ट कराया जा सकता है. यह फैसला तब लिया जब एक पति ने अपनी पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बच्चा उसका नहीं है. इसलिए उसे इस शादी से आजादी चाहिए. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या था.

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क्या है मामला? 

मामला दो कपल्स के बीच का था जो एक-दूसरे से तलाक ले रहे थे. इस दौरान पति का आरोप था कि यह बच्चा उसका नहीं है और उसे अपनी पत्नी से तलाक चाहिए. वहीं, इसको लेकर महिला का कहना था कि किसी को DNA टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. कोर्ट में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्नता बी. वराले की बेंच ने महिला की यह याचिका खारिज कर दी, जिसने बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट का विरोध किया था.

कब कराया जा सकता है DNA टेस्ट?

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि DNA टेस्ट का आदेश तभी दिया जाना चाहिए, जब बच्चे की पैटरनिटी विवाद का सीधा मुद्दा हो, अगर दूसरे सबूतों से बहस को हल किया जा सकता है तो केवल शक या आरोप के आधार पर DNA टेस्ट का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि DNA टेस्ट कराने से पहले यह देखना जरूरी है कि इससे मामले में न्याय करने में मदद मिलेगी या नहीं. अगर मदद मिल रही है तो टेस्ट कराया जा सकता है. 

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हर मामले में नहीं दिया जा सकता DNA टेस्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसलों को दोहराते हुए कहा कि DNA टेस्ट कोई नॉर्मल या रूटीन टेस्ट नहीं है. इसे सिर्फ विवाद होने पर किया जा सकता है. ऐसे मामलों में अदालत के सामने सिर्फ कपल्स के अधिकार नहीं होते, बल्कि बच्चे की पहचान और गरिमा से जुड़े सवाल भी होते हैं. इसलिए DNA टेस्ट का आदेश देने से पहले ठीक तरह से सोच लिया जाए। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या बताता है?

साफ तौर पर कहा जाए तो सिर्फ पति के शक के आधार पर बच्चे का DNA टेस्ट नहीं कराया जा सकता, लेकिन अगर मुद्दा बड़ा है तो पक्ष की बात पर गौर करके फैसला लिया जा सकता है. DNA टेस्ट रिपोर्ट इस बात को साबित कि यह बच्चा किसका है और इसका पिता कौन है.

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First published on: Aug 20, 2026 10:39 AM

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