सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को एक छात्र को नोटिस जारी करने पर फटकारा है. कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने पर एक छात्र को नोटिस जारी करने को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकता है, जबकि कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
सीजेआई ने पूछा, ‘मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी किया? हमारा आदेश साफ था कि देश भर में किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जबरदस्ती वाली कार्रवाई नहीं की जा सकती. मजिस्ट्रेट की ऐसी हिम्मत कैसे हुई?’
साथ ही सीजेआई ने कहा कि हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है. हमने स्पष्ट आदेश पारित किया है.
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SC ने 1 सितंबर को क्या कहा था
बता दें, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए CJP विरोध प्रदर्शनों से जुड़े छात्रों के खिलाफ सभी मामलों को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि विरोध प्रदर्शनों के संबंध में किसी भी छात्र के खिलाफ कोई नई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा केस?
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया. वकील ने कहा कि छात्रों पर ‘प्रयोग’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत था. हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया. सीजेआई ने वकील से मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे.
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क्या है पूरा मामला
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था. नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था. हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया.
छात्र अक्षत त्रिपाठी ने हालांकि आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था तथा उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहा था. यह नोटिस चार सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था.
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