तलाक को लेकर SC कोर्ट का बड़ा फैसला, क्या आपसी सहमति से हुए डिवोर्स से पीछे हट सकते हैं पति या पत्नी?

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले की याचिका निपटाते हुए बड़ा जजमेंट दिया है। मामला आपसी सहमति से हुए तलाक से जुड़ा था, जिससे एक पक्ष पीछे हटना चाहता था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बड़ा फैसला सुनाया, जिसके बारे में देशवासियों को जरूर पता होना चाहिए।

Supreme Court

Credit- News 24 GFX

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े मामलों में बेहद अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए जजमेंट दिया कि आपसी सहमति से तलाक होने के बाद पति या पत्नी में से कोई भी सहमति से पीछे नहीं हट सकता। मामलों में अंतिम डिक्री होने से पहले दोनों पक्षों मे से कोई पीछे हटना चाहते तो हट सकता है, यानी अपनी सहमति वापस ले सकता है, लेकिन अगर कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद पीछे हटना चाहते हैं तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।

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23 साल बाद दायर किया था डिवोर्स केस

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंडल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने जजमें सुनाते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। याचिकाकर्ता के द्वार समझौते से पीछे हटने पर कड़ी नाराजगी जताई। दरअसल, साल 2000 में शादी हुई और 23 साल बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा, जहां काउंसिलिंग के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक लेने और आपसी सहमति से विवादों का निपटारा करने का फैसला किया।

आपसी सहमति से लिया था दोनों ने तलाक

बता दें कि आपसी सहमति हुए तलाक और समझौते के अनुसार, पति ने पत्नी को 2 किश्तों में 1.5 करोड़ रुपये दिए। 14 लाख रुपये कार खरीदने के लिए दिए और कुछ गहने भी दिए।। पत्नी ने जॉइंट अकाउंट से 2.5 करोड़ रुपये पति को ट्रांसफर करने पर सहमति जताई। फिर दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लिया और समझौते के अनुसार लेन-देन किया, लेकिन पत्नी ने अपनी सहमति वापस ले ली और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत भी दे दी, जिस पर मजिस्ट्रेट ने समन जारी किए।

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सहमति वापस ले सकते हैं, पर शर्त अनुसार

सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट देते हुए बताया कि आपसी सहमति से हुए तलाक के मामलों में सहमति वापस लेने का अधिकार पति-पत्नी दोनों पक्षों को है, लेकिन अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से सभी विवादों का निपटारा कर लें तो यह अधिकार नहीं मिलता। मध्यस्थता के जरिए आपसी सहमति से हुए तलाक भी कानून के अनुसार होते हैं और ऐसे में इस कानूनी प्रक्रिया से पीछे हटना न्यायिक प्रक्रिया और मध्यस्थता व्यवस्था की बुनियाद के लिए ठीक नहीं है और इससे व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ सकता है।

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समझौते से हटने के पीछे पत्नी की दलील

बेंच ने कहा कि अगर दोनों पक्षों में से कोई बिना उचित कारण के समझौते से पीछे हटता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए, ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया के दुरुपयोग पर रोक लगे। पत्नी ने समझौते से पीछे हटते हुए दलील दी कि पति ने उसे 120 करोड़ के गहने और 50 करोड़ के सोने के बिस्कुट देने का वादा किया था, लेकिन उन्हें समझौते में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वह टैक्स से बचना चाहता था। इस दलील पर बेंच ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह न्याय प्रणाली का अनादर है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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