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रूस में बर्फबारी ने तोड़ा 146 सालों का रिकॉर्ड, भारत के पहाड़ ‘बर्फ बिन सून’, क्यों है ये खतरे का संकेत?

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बुरांश के पेड़ों पर जनवरी में ही फूल झलकने लगे हैं, जो 'राज्य पुष्प' होने के नाते मौसम का आईना है. सामान्य दिनों में ये फूल फरवरी अंत में खिलते हैं, लेकिन समय से पहले पड़ी गर्मी ने मौसम के इस चक्र को भी बदल दिया.

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रूस और पूर्वी चीन में बर्फबारी ने 146 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जहां मॉस्को से केमरोवो तक जीवन ठहर सा गया. कुछ ही दिनों में जितनी बर्फ गिरी, उतनी नॉर्मल महीनों में गिरती है. उधर, भारत के हिमालयी क्षेत्र में बिल्कुल उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है, उत्तराखंड और हिमाचल के ऊंचे पहाड़ बर्फहीन नजर आ रहे हैं. जनवरी का आधा महीना बीत गया है और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल सूने पड़े हैं, पर्यटक निराश होकर लौट रहे हैं. मौसम के बीच ये बदलाव जलवायु परिवर्तन के बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है.

मौसम में बढ़ रही गर्मी, टूट रहा चक्र


उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बुरांश के पेड़ों पर जनवरी में ही फूल झलकने लगे हैं, जो ‘राज्य पुष्प’ होने के नाते मौसम का आईना है. सामान्य दिनों में ये फूल फरवरी अंत में खिलते हैं, लेकिन समय से पहले पड़ी गर्मी ने मौसम के इस चक्र को भी बदल दिया. वैज्ञानिक इसे तापमान में बढ़ोतरी का संकेत मानते हैं. साथ ही, बर्फ की कमी से जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं. ज्योतिर्मठ के चाई गांव और फूलों की घाटी के करीब धुआं उठा था, वहीं किन्नौर जैसे क्षेत्रों में भी ऐसी आगजनी देखी गई.

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क्यों है ये संकट की बात?


इतना ही नहीं, बर्फबारी की कमी पानी के स्रोतों को सूखा रही है. ग्लेशियरों पर निर्भर नदियां प्रभावित होंगी, जिससे गर्मियों में पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत संकट गहरा सकता है. हॉर्टिकल्चर विशेषज्ञ फलों की फसल पर चिंता जता रहे हैं, क्योंकि नमी की कमी बागानों को नुकसान पहुंचाएगी. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर में उत्तर भारत में कोई वर्षा या हिमपात नहीं हुआ, जो लंबे सूखे का प्रमाण है.

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रूस-चीन इतनी बर्फबारी क्यों?


वैज्ञानिकों का मानना है कि सब-ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम के उत्तर की ओर खिसकने से रूस-चीन में सामान्य से ज्यादा बर्फबारी हो रही है. मौसम विशेषज्ञ मनोज पाठक बताते हैं कि भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ रहे हैं, जो हिमालय को प्रभावित कर रहे.

First published on: Jan 18, 2026 07:15 PM

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