कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वे 2028 में होने वाला कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. इससे पहले, कांग्रेस आलाकमान के नेतृत्व परिवर्तन के फैसले के तहत सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे 29 मई को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया था. इसके बाद डीके शिवकुमार के राज्य का नया मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ. सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि वे चुनावी राजनीति से जरूर हट रहे हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति में रहकर पार्टी के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे. सिद्धारमैया का चुनावी मैदान से हटना केवल एक नेता का संन्यास नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक कांग्रेस के पावर स्ट्रक्चर में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है. हालांकि चुनाव न लड़ने के बावजूद 2028 में पार्टी टिकट बंटवारे में उनकी भूमिका सबसे निर्णायक रहेगी.
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सिद्धारमैया के इस फैसले के 3 मुख्य कारण
कर्नाटक की राजनीति में सामाजिक न्याय और अहींदा आंदोलन के ध्वजवाहक रहे सिद्धारमैया के इस कदम के पीछे प्रमुख रणनीतिक और व्यक्तिगत कारण हैं:
- आलाकमान के फॉर्मूले और जन-वादे का सम्मान
2023 में राज्य में सरकार बनने के समय ही ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के बंटवारे की चर्चा थी. मई 2026 में अपने 3 साल पूरे करने के बाद सिद्धारमैया ने आलाकमान के निर्देश का पालन करते हुए पद छोड़ दिया. साथ ही, उन्होंने 2023 चुनाव के समय वरुणा की जनता से वादा किया था कि वह उनका आखिरी प्रत्यक्ष चुनाव होगा.
- कांग्रेस में अगली पीढ़ी की तैयारी
सिद्धारमैया का मानना है कि पार्टी में दूसरी पंक्ति के युवा और अनुभवी नेताओं को आगे आने का मौका मिलना चाहिए. चुनावी मैदान से हटकर वे राज्य में पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में अधिक ध्यान दे पाएंगे.
- उम्र और स्वास्थ्यगत कारक
77 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके सिद्धारमैया 2028 के चुनावों तक 80 की उम्र पार कर जाएंगे. इस उम्र में लगातार जनसंपर्क और चुनावी अभियान चलाना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है.
सिद्धारमैया के फैसले के 3 दूरगामी प्रभाव
- अहींदा वोट बैंक का पुनर्गठन
कुरुबा समुदाय, पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच सिद्धारमैया जैसा जनाधार किसी अन्य नेता के पास नहीं है. उनके मैदान में न होने पर इन वर्गों के वोटों को एकजुट रखना नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
- डीके शिवकुमार का निर्विवाद नेतृत्व
सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने और भविष्य में चुनाव न लड़ने के ऐलान से कर्नाटक कांग्रेस में वर्षों से चली आ रही गुटबाजी समाप्त हो गई है. डीके शिवकुमार अब 2028 के चुनावों में पार्टी के मुख्य चेहरे के रूप में उभरेंगे.
- वरुणा सीट पर बेटे यतीन्द्र का उत्तराधिकार
सिद्धारमैया की पारंपरिक वरुणा विधानसभा सीट पर उनके बेटे और एमएलसी डॉ. यतीन्द्र सिद्धारमैया की निर्विरोध दावेदारी पक्की हो गई है, जिससे परिवार की राजनीतिक विरासत सुरक्षित रहेगी.