डॉक्टर की पर्ची के बिना अब नहीं मिलेगा सिरप, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जारी किया गया नोटिफिकेशन
स्वास्थ्य मंत्रालय का फैसला, डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी खांसी की सिरप
Edited By : Versha Singh|Updated: Jun 16, 2026 11:32
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सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में एक नया बदलाव करके कफ सिरप समेत सभी सिरप की बिक्री के नियमों को और कड़ा कर दिया है. इस बदलाव के तहत, अब ग्राहकों को फार्मेसी से ऐसी दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) दिखानी होगी.
यह कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में खराब क्वालिटी वाले कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के कुछ महीनों बाद उठाया गया है. इन घटनाओं ने आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली लिक्विड दवाओं की सुरक्षा और रेगुलेशन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं. इन घटनाओं के बाद सिरप बनाने और उनकी बिक्री पर बेहतर निगरानी और सख्त जांच की मांग फिर से तेज हो गई थी.
9 जून, 2026 की तारीख वाला यह नोटिफिकेशन, पिछले साल दिसंबर में जारी किए गए ड्राफ्ट प्रस्ताव पर जनता की राय पर विचार करने के बाद प्रकाशित किया गया था.
इस संशोधन से 'ड्रग्स रूल्स' की 'शेड्यूल K' में बताई गई दवाओं की कैटेगरी से "सिरप" शब्द हटा दिया गया है. इस कदम से बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली (ओवर-द-काउंटर) इनकी उपलब्धता खत्म हो जाएगी और ये ज्यादा सख्त रेगुलेटरी कंट्रोल के दायरे में आ जाएंगी.
नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है?
नोटिफिकेशन के अनुसार, केंद्र सरकार ने 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' की धारा 12 और 33 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन किया है.
नोटिफिकेशन में लिखा है: "इन नियमों को 'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026' कहा जाएगा" और इसमें यह भी कहा गया है कि ये "ऑफिशियल गजट में इनके पब्लिश होने की तारीख से लागू होंगे."
इस संशोधन में साफ तौर पर कहा गया है कि ड्रग्स रूल्स, 1945 की शेड्यूल K में, "क्लास ऑफ ड्रग्स" (दवाओं की श्रेणी) हेडिंग के तहत, सातवें आइटम में "सिरप" शब्द को हटा दिया जाएगा.
इस रेगुलेटरी बदलाव का मतलब है कि सिरप (जिनमें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले कफ सिरप भी शामिल हैं) अब बिना मेडिकल मंजूरी के सीधे दुकानों से नहीं खरीदे जा सकेंगे. ऐसी दवाएं खरीदने वाले कंज्यूमर्स को अब रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर का लिखा हुआ प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा.
माना जा रहा है कि इस कदम का असर कफ और दूसरी मेडिसिनल सिरप की आम खरीद पर पड़ेगा, जो पहले सीधे फार्मेसी से मिल जाती थीं.
ड्राफ्ट नियम पहले पब्लिश किए गए थे
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि संशोधन का प्रस्ताव करने वाले ड्राफ्ट नियम 30 दिसंबर, 2025 को पब्लिश किए गए थे, जिनमें जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे.
सरकार ने कहा कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले कंसल्टेशन पीरियड के दौरान मिली टिप्पणियों पर विचार किया गया. यह नोटिफिकेशन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी हर्ष मंगला ने जारी किया था.
संशोधन लागू होने के बाद, देश भर की फार्मेसी को सिरप और उससे जुड़े फॉर्मूलेशन की बिक्री से जुड़े बदले हुए नियमों का पालन करना होगा.
सरकार ने ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में एक नया बदलाव करके कफ सिरप समेत सभी सिरप की बिक्री के नियमों को और कड़ा कर दिया है. इस बदलाव के तहत, अब ग्राहकों को फार्मेसी से ऐसी दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) दिखानी होगी.
यह कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में खराब क्वालिटी वाले कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के कुछ महीनों बाद उठाया गया है. इन घटनाओं ने आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली लिक्विड दवाओं की सुरक्षा और रेगुलेशन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं. इन घटनाओं के बाद सिरप बनाने और उनकी बिक्री पर बेहतर निगरानी और सख्त जांच की मांग फिर से तेज हो गई थी.
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9 जून, 2026 की तारीख वाला यह नोटिफिकेशन, पिछले साल दिसंबर में जारी किए गए ड्राफ्ट प्रस्ताव पर जनता की राय पर विचार करने के बाद प्रकाशित किया गया था.
इस संशोधन से ‘ड्रग्स रूल्स’ की ‘शेड्यूल K’ में बताई गई दवाओं की कैटेगरी से “सिरप” शब्द हटा दिया गया है. इस कदम से बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली (ओवर-द-काउंटर) इनकी उपलब्धता खत्म हो जाएगी और ये ज्यादा सख्त रेगुलेटरी कंट्रोल के दायरे में आ जाएंगी.
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नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है?
नोटिफिकेशन के अनुसार, केंद्र सरकार ने ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 12 और 33 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन किया है.
नोटिफिकेशन में लिखा है: “इन नियमों को ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ कहा जाएगा” और इसमें यह भी कहा गया है कि ये “ऑफिशियल गजट में इनके पब्लिश होने की तारीख से लागू होंगे.”
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इस संशोधन में साफ तौर पर कहा गया है कि ड्रग्स रूल्स, 1945 की शेड्यूल K में, “क्लास ऑफ ड्रग्स” (दवाओं की श्रेणी) हेडिंग के तहत, सातवें आइटम में “सिरप” शब्द को हटा दिया जाएगा.
इस रेगुलेटरी बदलाव का मतलब है कि सिरप (जिनमें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले कफ सिरप भी शामिल हैं) अब बिना मेडिकल मंजूरी के सीधे दुकानों से नहीं खरीदे जा सकेंगे. ऐसी दवाएं खरीदने वाले कंज्यूमर्स को अब रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर का लिखा हुआ प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा.
माना जा रहा है कि इस कदम का असर कफ और दूसरी मेडिसिनल सिरप की आम खरीद पर पड़ेगा, जो पहले सीधे फार्मेसी से मिल जाती थीं.
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ड्राफ्ट नियम पहले पब्लिश किए गए थे
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि संशोधन का प्रस्ताव करने वाले ड्राफ्ट नियम 30 दिसंबर, 2025 को पब्लिश किए गए थे, जिनमें जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे.
सरकार ने कहा कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले कंसल्टेशन पीरियड के दौरान मिली टिप्पणियों पर विचार किया गया. यह नोटिफिकेशन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी हर्ष मंगला ने जारी किया था.
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संशोधन लागू होने के बाद, देश भर की फार्मेसी को सिरप और उससे जुड़े फॉर्मूलेशन की बिक्री से जुड़े बदले हुए नियमों का पालन करना होगा.