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चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी! रूस के इस ‘सीक्रेट खजाने’ पर टिकी भारत की नजर

चीन से अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने के लिए भारत का यह 'ग्लोबल हंट' सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है.

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चीन के बढ़ते आर्थिक और तकनीकी दबदबे को सीधी चुनौती देने के लिए भारत ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. भारत की नजर अब रूस के सुदूर और बर्फ से ढके साइबेरियाई क्षेत्र में छिपे ‘खजाने’ पर है. भारत सरकार की कंपनी IREL (इंडिया रेयर अर्थ्स लिमिटेड) रूस की दिग्गज ऑयल प्रोडक्शन कंपनी रोजनेफ्ट के साथ टॉमटॉर भंडार से ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ के नमूनों के लिए बातचीत कर रही है.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब नई दिल्ली, चीन के प्रभुत्व वाले इन अहम खनिजों की अपनी घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहती है. भारत और चीन के बीच सीमा पर लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए यह कूटनीतिक कदम बेहद अहम माना जा रहा है.

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सरकारी चैनलों के जरिए सीक्रेट डील

मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत पूरी तरह सीक्रेट है और सरकारी चैनलों के जरिए से आगे बढ़ रही है. इन दुर्लभ खनिजों के नमूनों को भारत भेजने से पहले रूस में ही प्रोसेस किया जाएगा. भारत टॉमटॉर भंडार में कोई भी बड़ा या गहरा निवेश करने से पहले इसके मिनरल कंपोजिशन का बारीकी से अध्ययन करना चाहता है.

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क्यों खास है रूस का टॉमटॉर डिपॉजिट?

यह भंडार रूस के साइबेरियाई क्षेत्र ‘याकुतिया’ में स्थित है. इसे वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े अविकसित रेयर अर्थ भंडारों में से एक माना जाता है, जिसे पिछले साल ही रोजनेफ्ट ने हासिल किया था.

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अमेरिका की बढ़ेगी टेंशन!

भारत का यह कदम अमेरिका के लिए थोड़ी चिंता पैदा कर सकता है. दरअसल, यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाते हुए कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे रोजनेफ्ट और लुकोइल जैसी कंपनियां प्रभावित हैं. इसके बावजूद भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए रूस के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ा रहा है.

EV और डिफेंस सेक्टर के लिए क्यों ‘अमृत’ हैं ये खनिज?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक और भविष्य की तकनीक के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं. इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर्स में लगने वाले स्थायी चुंबक बनाने के लिए होता है. इसके अलावा क्लिन एनर्जी और डिफेंस एप्लिकेशंस की एक बड़ी सीरीज में इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

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भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ पृथ्वी भंडार मौजूद है, लेकिन कमर्शियल स्केल पर इन्हें रिफाइन करने और उच्च शुद्धता स्तर तक अलग करने की आधुनिक सुविधाओं की भारी कमी है. यही वजह है कि भारत अभी तक घरेलू स्तर पर इन चुंबकों का उत्पादन नहीं कर पाता है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार ने हाल ही में रेयर अर्थ चुंबक निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 73 बिलियन रुपये के बड़े पैकेज को मंजूरी दी है.

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म्यांमार से लेकर अर्जेंटीना तक भारत का ‘ग्लोबल हंट’

चीन से अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने के लिए भारत का यह ‘ग्लोबल हंट’ सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है. पिछले साल भारत ने एक शक्तिशाली विद्रोही समूह की मदद से पड़ोसी देश म्यांमार से भी रेयर अर्थ के नमूनों की खोज की थी. इसके अलावा व्यावसायिक रूप से इन चुंबकों के निर्माण के लिए आईआरईएल जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ भी लगातार बातचीत कर रहा है. वहीं, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और मलावी में भी भारत खनन के अवसरों की तलाश कर रहा है.

First published on: Jun 16, 2026 03:59 PM

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About the Author

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.

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