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जबरन फूल देना भी यौन उत्‍पीड़न! SC ने टीचर की हरकत को माना गलत, जानें फ‍िर क्‍यों कर द‍िया र‍िहा?

Sexual Harassment Case Supreme Court Verdict: स्कूली छात्रा के यौन शोषण से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए आरोपी टीचर को बरी कर दिया है। पीठ ने टीचर की हरकत को पोक्सो एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न माना है, लेकिन पुलिस को मामले की गहन जांच करने का आदेश हुए उसके खिलाफ कोई एक्शन अभी लेने से इनकार कर दिया।

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Supreme Court Verdict in Pocso Act Case: सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची को फूल लेने के लिए मजबूर करने को यौन शोषण बताते हुए एक केस में फैसला सुनाया। टीचर की हरकत को पॉक्सो एक्ट (POCSO) के तहत अपराध माना, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी टीचर को बरी भी कर दिया।

पीठ ने टिप्प्णी की कि एक टीचर-गुरु के रिश्ते पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए जब तक यौन उत्पीड़न का पुख्ता सबूत न मिल जाए, तब तक मामले में कानूनी कार्रवाई करना रिश्ते को कलंकित करने जैसा है। टीचर की अपनी छवि भी खराब होगी, इसलिए पुलिस मामले की गहराई से जांच करे और सबूत पेश करे। उसके बाद मामले में आगे का फैसला लिया जाएगा।

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बच्ची को मोहरा बनाने की आशंका जताई

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस के वी विश्वनाथन, जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने आशंका जताई कि बच्ची को मोहरा बनाया जा रहा है, क्योंकि पुलिस की जांच में बच्ची के परिवार और टीचर के परिवार के बीच व्यक्तिगत विवाद सामने आए हैं। ऐसे में पीठ ने कहा कि इस एंगल को ध्यान में रखकर मामले की गहन जांच बनती है कि क्या बच्ची को मोहरा बनाकर व्यक्तिगत खुंदक तो नहीं निकाली जा रही?

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जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कि पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण केसों में कड़ी सजा दी जाती है, लेकिन जब मामला स्कूल जैसे पब्लिक प्लेस से जुड़ा हो और टीचर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हो, तब मामला गंभीर हो जाता है। ऐसे में यह देखना जरूरी हो जाता है कि टीचर को बदनाम करने के लिए लड़की और उसके परिवार वाले कानून का फायदा तो नहीं उठा रहे, क्योंकि स्कूल में छात्राएं शिक्षकों की जिम्मेदारी होती हैं।

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पुलिस को गहन जांच करने के निर्देश

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पुलिस जांच में विसंगतियां होने की आशंका जाहिर की है। तमिलनाडु के वरिष्ठ वकील ने एक दलील दी थी कि इस तरह के मामलों में लिए गए फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। इसलिए कोर्ट को ध्यान देना होगा कि सबूतों से छेड़छाड़ न हुई हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से भी सहमति जताई।

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First published on: Mar 14, 2024 11:17 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं एमफिल कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हूं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हूं। चीफ सब एडिटर की भूमिका निभाते हुए यहां की कोर टीम का हिस्सा हूं। नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम, फीचर आदि टॉपिक कवर करती हूं। घूमने, खाने और शॉपिंग की शौकीन खुशबू को नए ट्रेंड, नई जगह और ऐडवेंचर की तलाश रहती है।

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