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SIR के तनाव पर ‘सुप्रीम मरहम’… BLO की मौतों पर संज्ञान लेकर SC ने राज्यों को दिए ये बड़े निर्देश

देशभर में चल रहे एसआईआर का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सरकारों को अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकारों को अतिरिक्त भर्ती करने समेत कई निर्देश दिए हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Author Edited By : Raghav Tiwari
Updated: Dec 4, 2025 14:09
सुप्रीम कोर्ट

चुनाव आयोग ने बिहार के बाद अब पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) कराने का फैसला किया है। इस साल के अंत में यह प्रक्रिया पूरी होनी है। इसके लिए आयोग ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। हालांकि इसके दवाब के चलते कई जगहों से बीएलओ के मौतों की खबर भी आईं हैं। इसके बाद चुनाव आयोग ने एसआईआर का काम पूरा करने के लिए समय भी बढ़ाया लेकिन विपक्ष ने सरकार को घेरना बंद नहीं किया। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री हो चुकी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि SIR प्रक्रिया वैध कार्यवाही है। इसे पूरा करना होगा। अगर कहीं स्टाफ की कमी है तो यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि राहत न मिलने की स्थिति में BLO कोर्ट का रुख भी कर सकते है। CJI ने कहा कि राज्य द्वारा SIR (Special Revision) के लिए चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए कर्मचारी इन कर्तव्यों का पालन करने के बाध्य हैं। यदि उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि अत्यधिक कार्यभार तो राज्य सरकार इन कठिनाइयों को दूर कर सकती है।

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वहीं कोर्ट ने राज्यों को साफ निर्देश दिए कि BLO पर दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करें। कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि अगर कोई BLO व्यक्तिगत कारणों से SIR करने में सक्षम नहीं है तो उचित कारणों की स्थिति में उन्हें राहत देने पर विचार किया जाए। उनकी जगह किसी दूसरे को काम पर लगाया जाए।

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SIR मामले पर सुनवाई के दौरान BLOs के आत्महत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया गया। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि हमारे पास 35 से 40 BLOs की जानकारी है जिन्होंने आत्महत्या की है। ये सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक आदि हैं। रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के तहत SIR में शामिल कर्मियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस भेजी जा रही जिसमें कहा गया है कि यदि वे समय सीमा का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें 2 साल की कैद हो सकती है। यूपी में बीएलओ के खिलाफ 50 FIR दर्ज की गई हैं।

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मामले पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि BLOs पर दबाव वाकई चिंताजनक है। इतनी जल्दी क्यों? SIR के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल पूछा कि राज्य सरकारें क्यों नहीं आ रहीं? यदि राज्य सरकारें कठिनाई में हैं तो वे यहां आकर स्पष्ट क्यों नहीं कर रहीं?

First published on: Dec 04, 2025 02:01 PM

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