किस बात पर भड़के Ola-Uber ड्राइवर? दो मांगों को लेकर नेशनल स्ट्राइक, आज देशभर में हड़ताल से कैब मिलना मुश्किल

शनिवार को ओला, उबर और रैपिडो की सेवाएं कई शहरों में प्रभावित हो सकती हैं. गिग ड्राइवर्स ने कम कमाई और नियमों में बदलाव की मांग को लेकर 6 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. अगर आप कैब बुक करने की सोच रहे हैं, तो पहले ये खबर जरूर जान लें.

OLa Uber On strike

आज Ola Uber और Rapido की देशव्यापी हड़ताल. (Photo-News24 GFX)

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Ola Uber Rapido Driver on Strike: अगर आप आज शनिवार को ओला, उबर या रैपिडो से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. देशभर में गिग ड्राइवर्स ने सामूहिक हड़ताल का ऐलान किया है. ड्राइवरों का कहना है कि उनकी कमाई लगातार घट रही है और काम की शर्तें अस्थिर हो गई हैं. इसी को लेकर उन्होंने सरकार और कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है.

देशभर में 6 घंटे का ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’

ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों ने शनिवार को छह घंटे तक ऐप से लॉग-आउट रहने का फैसला किया है. इस विरोध को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है. इसका असर कई बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है, जहां यात्रियों को कैब और बाइक टैक्सी मिलने में दिक्कत हो सकती है.

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किसने बुलाई हड़ताल और क्या है मांग

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) की ओर से बुलाई गई है. यूनियन का कहना है कि ड्राइवर लंबे समय से कम कमाई और अस्थिर आय की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

ड्राइवरों की पहली मांग- न्यूनतम किराया तय हो

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यूनियन की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार न्यूनतम बेस किराया तय करे. ड्राइवरों का कहना है कि अभी एग्रीगेटर कंपनियां अपने हिसाब से किराया तय करती हैं, जिससे उनकी कमाई लगातार घट रही है. उनका मानना है कि अगर सरकार फिक्स किराया लागू करे तो ड्राइवरों और यात्रियों दोनों को फायदा मिलेगा.

दूसरी मांग- निजी वाहनों के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक

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यूनियन ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के उस प्रावधान का भी विरोध किया है, जिसमें निजी वाहनों को भी कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति दी गई है. उनका कहना है कि इससे लाइसेंसधारी कमर्शियल ड्राइवरों के सामने अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है.

ऐप कंपनियों पर शोषण के आरोप

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यूनियन का आरोप है कि लाखों ऐप-आधारित ड्राइवर असुरक्षा और आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं, जबकि प्लेटफॉर्म कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है कि ड्राइवरों के साथ बातचीत शुरू की जाए और उनके लिए निष्पक्ष नियम बनाए जाएं.

आर्थिक सर्वेक्षण ने भी जताई चिंता

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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, देश में गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आय की स्थिरता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत गिग वर्कर्स की मासिक आय 15 हजार रुपये से भी कम है. वहीं, गिग वर्कर्स की संख्या FY21 के 77 लाख से बढ़कर FY25 में करीब 1.2 करोड़ तक पहुंच गई है.

यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर

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ड्राइवरों के ऐप से ऑफलाइन रहने के कारण शनिवार को कई शहरों में कैब की उपलब्धता कम हो सकती है. ऐसे में यात्रियों को ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है या किराया भी बढ़ सकता है. इसलिए अगर जरूरी यात्रा है, तो पहले से वैकल्पिक व्यवस्था रखना बेहतर होगा.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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