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पीएम मोदी ने हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखा कर किया रवाना, आखिर कैसे काम करता है इसका इंजन?

Jind to Sonipat Hydrogen Train: भारत को पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन मिल चुकी है, जिसकी सर्विस हरियाणा के जींद से सोनीपत तक दी गई है. पीएम मोदी ने एक खास कार्यक्रम में इस मॉडर्न रेल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. आइए जानते हैं इसकी खास बात क्या है.

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India’s First Hydrogen Powered Train: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब पटरियों पर उतर चुकी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह ट्रेन चलती कैसे है? इसमें हाइड्रोजन फ्यूल कैसे भरा जाता है? क्या ये डीजल इंजन की जगह ले सकती है? और इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की ट्रेन के लोको पायलट चंद्रकांत से.

कैसे काम करता है हाइड्रोजन फ्यूल?

पहली नजर में ये ट्रेन किसी नॉर्मल ट्रेन जैसी ही दिखाई देती है, लेकिन इसकी असली ताकत इसके इंजन के अंदर छिपी है. इस ट्रेन में डीजल नहीं, बल्कि हाई प्रेशर वाले खास टैंकों में हाइड्रोजन गैस भरी जाती है. ये गैस सीधे इंजन में नहीं जलती.

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फ्यूल सेल से मिलती है बिजली

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तक पहुंचती है, जहां हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ इसकी रासायनिक प्रक्रिया होती है. इस प्रॉसेस से बिजली बनती है और वही बिजली इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है. यानी इंजन को चलाने की ताकत फ्यूल सेल से मिलने वाली बिजली देती है.

हाई-प्रेशर टैंक का इस्तेमाल

लोको पायलट चंद्रकांत बताते हैं कि हाइड्रोजन को बेहद सुरक्षित तरीके से हाई-प्रेशर टैंकों में स्टोर किया जाता है. ट्रेन में कई सफ्टी सेंसर लगे हैं, जो गैस के प्रेशर, तापमान और किसी भी तरह के रिसाव पर लगातार नजर रखते हैं. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देता है.

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कैसे भरा जाता है हाइड्रोजन?

हाइड्रोजन भरने का प्रॉसेस भी नॉर्मल डीजल की तरह नहीं होती. इसके लिए विशेष हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाए जाते हैं, जहां हाई-प्रेशर पाइपलाइन के जरिए कुछ ही मिनटों में टैंक भरे जाते हैं. पूरा प्रॉसेस कंप्यूटर से कंट्रोल होता है ताकि सेफ्टी से कोई समझौता न हो.

ईको फ्रेंडली ट्रेन

इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इससे धुआं नहीं निकलता. फ्यूल सेल के प्रॉसेस के बाद सिर्फ पानी और जलवाष्प निकलती है. यही वजह है कि इसे ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, डीजल पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.

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First published on: Jul 17, 2026 11:57 AM

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About the Author

Varun Sinha

वरुण सिन्हा पिछले 17 साल से मीडिया में अनुभव वर्तमान में न्यूज 24 में दिल्ली मेट्रो एडिटर के रूप में कार्यरत है। पिछले कई वर्षों में इतिहास और उससे जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया है। इसके अलावा देश की राजधानी दिल्ली की हर खबर को समझने और समझाने का आम जन को प्रयास किया है।

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Shariqul Hoda

वरुण सिन्हा पिछले 17 साल से मीडिया में अनुभव वर्तमान में न्यूज 24 में दिल्ली मेट्रो एडिटर के रूप में कार्यरत है। पिछले कई वर्षों में इतिहास और उससे जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया है। इसके अलावा देश की राजधानी दिल्ली की हर खबर को समझने और समझाने का आम जन को प्रयास किया है।

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