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बॉर्डर पर पाकिस्तान की चीनी तोपों पर भारत का पलटवार, उतारीं अत्याधुनिक K9 वज्र T तोपें

मौसम की खराबी का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने हाल ही में भारतीय सीमा के पास चीन निर्मित SH-15 हॉवित्जर तोपें तैनात की थीं. पाकिस्तान की इस दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने भी सीमा पर अपनी अत्याधुनिक K9 वज्र-T तोपें उतार दी हैं. जानिए दोनों तोपों की ताकत और कैसे भारतीय वज्र चीनी तोप पर भारी पड़ रहा है.

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मौसम की खराबी, बाढ़ और बरसात के माहौल का फायदा उठाकर पाकिस्तान एक बार फिर भारत की सीमा पर तनाव बढ़ाने की कोशिश में जुट गया है. रक्षा मंत्रालय और सेना के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारतीय सीमा के करीब चीन में बनी घातक SH-15 (PCL-181) 155 मिमी स्व-चालित हॉवित्जर तोपें तैनात की हैं. हालांकि, इतिहास गवाह है कि जंग की शुरुआत हमेशा पाकिस्तान ने की है, लेकिन उसका खात्मा भारतीय सेना ने ही किया है. पाकिस्तान की इस हरकत का करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने भी सीमा पर अपनी अत्याधुनिक और सर्वशक्तिमान K9 Vajra-T तोपों को तैनात कर दिया है.

इंडियन आर्मी के पास जवाब देने की दुगनी ताकत

डिफेंस एक्सपर्ट दिनाकरन पेरी के मुताबिक जिस चीनी टैंक का इस्तेमाल पाकिस्तान करता है उसे SH-15 155 मिमी, 52-कैलिबर व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर को भारतीय सीमा के पास तैनात कर दिया है। इस टैंक की खासियत यह भी है कि यह बेहद तेजी से एक जगह से दूसरे जगह पर लंबी रेंज में फायर करने की ताकत रखता है।

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इंडियन आर्मी के पास इस तोप का जवाब देने की दुगनी ताकत है, क्योंकि इंडियन आर्मी के पास साउथ कोरिया की तकनीक पर बनी K9 Vajra-T स्व-चालित ट्रैक्ड हॉवित्जर मौजूद है। इसकी बनावट इस तरह से की गई है कि यह रेगिस्तान में बड़े ही तेजी से दुश्मन पर वार कर सकता है।

SH-15 और K9 Vajra-T में क्या अंतर?

भारतीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक दोनों ही तोपें 155 मिमी, 52-कैलिबर मॉडर्न टेक्नोलॉजी की हैं और 40 से 50 किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकती हैं। सिर्फ दोनों तोपों का डिजाइन अलग अलग बना हुआ है।

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  • SH-15 ट्रक एक व्हील्ड प्लेटफॉर्म पर है, जिससे किसी भी ट्रांसपोर्टर वाली नेटवर्क वाले इलाके में इसकी स्पीड सबसे ज्यादा होती है। बात करें K9 Vajra-T ट्रैक्ड की तो यह प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो कठिन और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में अपनी बेजोड़ मारक ताकत के लिए जानी जाती है।
  • K9 वज्र-T महज 1 मिनट में 6 से 8 गोले दाग सकती है और लगातार भारी गोलाबारी करने में सक्षम है. वहीं SH-15 की फायरिंग स्पीड धीमी है और लगातार इस्तेमाल पर इसे ठंडा करना पड़ता है.
    SH-15 की फायर करने की क्षमता K9 की तुलना में धीमी है और लगातार युद्ध की स्थिति में इसे बार-बार ठंडा होना पड़ता है।
    K9 वज्र-T में मजबूत आर्मर और एनबीसी (न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, केमिकल) सुरक्षा है, जिससे सैनिक पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. इसके मुकाबले चीनी तोप SH-15 हल्की है और गोलाबारी के दौरान इसमें सुरक्षा काफी कम मिलती है.

First published on: Aug 08, 2026 12:06 AM

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