'FCRA बिल इंटरनल मेटर है…', केंद्र ने विदेशी फंडिंग पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को किया खारिज

MEA ने FCRA बिल पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि ये भारत का इंटरनल मेटर है. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में फोरन फंडिंग को रोकने के लिए कानून हैं.

FCRA bill

Credit: News24

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गुरुवार को’फोरन कंट्रीब्यूशन(रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026′ को लेकर अमेरिकी सांसद राइली मूर को विदेश मंत्रालय (MEA) ने मुंहतोड़ जवाब दिया. MEA ने FCRA बिल पर उनकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि ये भारत का इंटरनल मेटर है. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में फोरन फंडिंग को रोकने के लिए कानून हैं. दरअसल, अमेरिकी सांसद मूर ने इस बिल में प्रस्तावित संशोधन को ईसाईयों के खिलाफ बताते हुए चेतावनी दी थी कि इससे भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास बढ़ सकती है.

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सरकार क्यों ला रही है ये बिल?

FCRA बिल के पीछे सरकार का मकसद है कि वो विदेशों से फंड लेने वाले NGO पर सीधी निगरानी रख सके. बिल में संशोधन के जरिए सरकार ऐसे गैर सरकारी संगठनों के लिए नियमों में और सख्ती लाने जा रही है. इस बिल के मुताबिक अगर कोई किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, रिन्यू नहीं होता या वो खुद सरेंडर करती है, तो उसकी फोरन फंडिंग या प्रॉपर्टी नामित प्राधिकरण (Designated Authority) के नाम हो जाएगी. फिर आगे सरकार की मर्जी है कि वो इस प्रॉपर्टी को कैसे भी इस्तेमाल करे. वहीं, अगर किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाए तो वो रद्द ही कहलाएगी.

क्या होंगे बदलाव?

विदेशी फंड के लिए भी टाइमलाइन सेट होगी, जिसके मुताबिक ही उसको अपने पास रखा या खर्च किया जा सकेगा. अगर किसी संस्था को सस्पेंड किया जाता है, तो वो अपनी प्रॉपर्टी किसी को बेच या ट्रांसफर नहीं कर पाएगी. FCRA मामलों से जुड़ी जांच के लिए अब सरकार से परमिशन लेना अनिवार्य होगा. अगर कोई नियम टूटता है तो डायरेक्टर, ट्रस्टी और पदाधिकारी को इसमें भागीदार माना जाएगा. हालांकि FCRA बिल में संशोधन के मुताबिक अब इन मामलों में सज़ा को घटाकर पांच साल की बजाय एक साल कर दिया जाएगा.

अमेरिकी सांसद ने जताई आपत्ति

हाल ही में अमेरिकी सांसद मूर ने कहा था कि अगर चर्च और धार्मिक चैरिटी का FCRA रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो जाता है, तो प्रस्तावित संशोधनों से मोदी सरकार उनपर कंट्रोल कर सकती है. मूर ने कहा कि ऐसे प्रावधानों का ईसाईयों पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वो FCRA में संशोधन पर फिर से विचार-विमर्श करे. वहीं भारत सरकार का कहना है कि FCRA में संशोधन का मकसद विदेशी फंडिंग से बनी पब्लिक प्रॉपर्टीज़ की सुरक्षा करना है. केंद्र इससे ये भी सुनिश्चित करेगी कि NGOs में चल रही सभी एक्टिविटीज़ कानून के दायरे में ही हों.

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Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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