प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत में राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुख्यमंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की. इस मीटिंग में ‘होर्मुज संकट’ को केंद्र में रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन सुरक्षा और राज्य स्तर की योजनाओं पर चर्चा हुई. हालांकि, आचार संहिता लागू होने के कारण पांच चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक से दूर रहे. बताया जा रहा है कि इन राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए कैबिनेट सचिवालय अलग से बैठक बुलाएगा.
राज्यों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
उधर, चुनावी राज्यों की अनुपस्थिति से सवाल उठे हैं कि क्या आचार संहिता का हवाला देकर राजनीतिक चर्चा से दूरी बनाई जा रही है? बैठक का मकसद पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से भड़के संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों का जायजा लेना था. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है. सरकार ने इससे पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. संसद के दोनों सदनों में पीएम मोदी ने इस संकट पर बयान दिया.
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देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं
वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है. सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि ‘साजिशन फैलाई जा रही गलत सूचनाओं से भ्रमित न हों, जो अनावश्यक घबराहट पैदा करने का प्रयास है.’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, ‘हम सभी संबंधित देशों से संपर्क में हैं ताकि हमारे जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर ऊर्जा जरूरतें पूरी करें. चार एलपीजी से लदे जहाज सफलतापूर्वक भारत पहुंच चुके हैं.’
जायस्वाल ने आगे कहा, ‘यह 1.4 अरब लोगों की जरूरतें, बाजार की गतिशीलता और वैश्विक स्थिति पर आधारित है. ये तीन कारक हमारे निर्णयों का आधार हैं.’ भारत ने रूस से कच्चे तेल और एलएनजी आयात बढ़ाकर संकट का सामना किया है. अमेरिका से छूट लेकर आपूर्ति चेन मजबूत की गई है.
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