तमिलनाडु चुनाव में इस गांव ने बनाया NOTA को वोट देने का मन, मतदान से पहले मांगा समस्या का हल

Tamil Nadu Elections: ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन से कई स्तरों पर शिकायतें कीं, मुख्यमंत्री कार्यालय तक याचिकाएं पहुंचाईं, लेकिन केवल अस्थायी राहत मिली. नए अधिकारियों के आने पर वही समस्याएं लौट आती हैं.

Tamil Nadu village
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तमिलनाडु के साथ-साथ अगले कुछ दिनों में पुडुचेरी, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाला है. चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों ने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है. एक तरफ जहां चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दल अलग-अलग तरीकों से जनता को मनाने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु का एक ऐसा भी गांव है जो अपने पुरानी समस्याओं का हल ना मिलने की वजह से इतना नाराज है कि ग्रामीणों ने अब NOTA को वोट देने का मन बना लिया है.

तमिलनाडु के ग्रामीणों ने बनाया ‘नोटा’ के चुनाव का मन

तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के ऊटी (उधागमंडलम) के करीब एक गांव है ‘अजूर’. यहां के निवासी दशकों पुरानी जद्दोजहद से तंग आ चुके हैं. जिला प्रशासन द्वारा उनकी शिकायतों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में वे ‘कोई नहीं’ (NOTA) का विकल्प चुनेंगे. यह फैसला गांव की पंचायत बैठक में सामूहिक रूप से लिया गया, जहां करीब 800 मतदाताओं ने एकजुट होकर विरोध जताया.

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क्या है ग्रामीणों की समस्या?


क्षेत्रीय आदिवासी समुदायों का यह गांव पीढ़ियों से नीलगिरि की वादियों में बसा है. पिछले दस वर्षों से वन विभाग के साथ भूमि विवाद चला आ रहा है. वन विभाग ने गांव के आसपास करीब 300 एकड़ भूमि को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया है, जिसमें 93 एकड़ आवासीय घरों और चरागाहों पर कब्जा है. बाकी भूमि पर गांव की लगभग 300 परिवारों ने चाय के पौधे लगाए हैं, प्रत्येक परिवार मात्र 10 सेंट भूमि पर निर्भर. स्थानीय निवासी रविकुमार ने एएनआई से कहा, ‘वन अधिकारियों की पाबंदियां हमारी पारंपरिक आजीविका को प्रभावित कर रही हैं. एक सदी से हम खेती, पत्तियां, डालियां और छोटी लकड़ियां इकट्ठा कर परिवार चलाते हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलता है.’

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ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन से कई स्तरों पर शिकायतें कीं, मुख्यमंत्री कार्यालय तक याचिकाएं पहुंचाईं, लेकिन केवल अस्थायी राहत मिली. नए अधिकारियों के आने पर वही समस्याएं लौट आती हैं. वनकर्मी पत्तियां इकट्ठा करने जैसी जरूरी गतिविधियों पर भी रोक लगा रहे हैं. ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि उनकी आजीविका वाली भूमि कानूनी रूप से आवंटित हो.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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