Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

देश

तमिलनाडु चुनाव में इस गांव ने बनाया NOTA को वोट देने का मन, मतदान से पहले मांगा समस्या का हल

Tamil Nadu Elections: ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन से कई स्तरों पर शिकायतें कीं, मुख्यमंत्री कार्यालय तक याचिकाएं पहुंचाईं, लेकिन केवल अस्थायी राहत मिली. नए अधिकारियों के आने पर वही समस्याएं लौट आती हैं.

Author
Written By: Akarsh Shukla Updated: Mar 27, 2026 19:02

तमिलनाडु के साथ-साथ अगले कुछ दिनों में पुडुचेरी, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाला है. चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों ने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है. एक तरफ जहां चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दल अलग-अलग तरीकों से जनता को मनाने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु का एक ऐसा भी गांव है जो अपने पुरानी समस्याओं का हल ना मिलने की वजह से इतना नाराज है कि ग्रामीणों ने अब NOTA को वोट देने का मन बना लिया है.

तमिलनाडु के ग्रामीणों ने बनाया ‘नोटा’ के चुनाव का मन

तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के ऊटी (उधागमंडलम) के करीब एक गांव है ‘अजूर’. यहां के निवासी दशकों पुरानी जद्दोजहद से तंग आ चुके हैं. जिला प्रशासन द्वारा उनकी शिकायतों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में वे ‘कोई नहीं’ (NOTA) का विकल्प चुनेंगे. यह फैसला गांव की पंचायत बैठक में सामूहिक रूप से लिया गया, जहां करीब 800 मतदाताओं ने एकजुट होकर विरोध जताया.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Kal Ka Mausam: अगले 24 घंटों में इन जिलों में बारिश देगी दस्तक, IMD ने जारी किया अलर्ट; जानें अपने राज्य का मौसम

क्या है ग्रामीणों की समस्या?


क्षेत्रीय आदिवासी समुदायों का यह गांव पीढ़ियों से नीलगिरि की वादियों में बसा है. पिछले दस वर्षों से वन विभाग के साथ भूमि विवाद चला आ रहा है. वन विभाग ने गांव के आसपास करीब 300 एकड़ भूमि को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया है, जिसमें 93 एकड़ आवासीय घरों और चरागाहों पर कब्जा है. बाकी भूमि पर गांव की लगभग 300 परिवारों ने चाय के पौधे लगाए हैं, प्रत्येक परिवार मात्र 10 सेंट भूमि पर निर्भर. स्थानीय निवासी रविकुमार ने एएनआई से कहा, ‘वन अधिकारियों की पाबंदियां हमारी पारंपरिक आजीविका को प्रभावित कर रही हैं. एक सदी से हम खेती, पत्तियां, डालियां और छोटी लकड़ियां इकट्ठा कर परिवार चलाते हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलता है.’

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: कांग्रेस ने 3 राज्यों में उतारे स्टार प्रचारक, जानिए राहुल-प्रियंका के साथ लिस्ट में और कौन-कौन

ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन से कई स्तरों पर शिकायतें कीं, मुख्यमंत्री कार्यालय तक याचिकाएं पहुंचाईं, लेकिन केवल अस्थायी राहत मिली. नए अधिकारियों के आने पर वही समस्याएं लौट आती हैं. वनकर्मी पत्तियां इकट्ठा करने जैसी जरूरी गतिविधियों पर भी रोक लगा रहे हैं. ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि उनकी आजीविका वाली भूमि कानूनी रूप से आवंटित हो.

First published on: Mar 27, 2026 07:02 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.