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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला… IVFRT 3.0 को 5 साल का विस्तार, इमिग्रेशन सिस्टम होगा हाईटेक

सरकार का कहना है कि IVFRT प्लेटफॉर्म का मकसद इमिग्रेशन, वीजा और विदेशियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सिस्टम को एकीकृत और आधुनिक बनाना है. इसके जरिए वैध विदेशी यात्रियों को सुविधा मिलेगी, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी.

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Written By: Kumar Gaurav Updated: Mar 25, 2026 19:36

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इमिग्रेशन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (IVFRT) योजना को 31 मार्च 2026 के बाद अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी गई है. यह योजना अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी, जिसके लिए ₹1800 करोड़ का बजट तय किया गया है.

सरकार का कहना है कि IVFRT प्लेटफॉर्म का मकसद इमिग्रेशन, वीजा और विदेशियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सिस्टम को एकीकृत और आधुनिक बनाना है. इसके जरिए वैध विदेशी यात्रियों को सुविधा मिलेगी, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी.

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इस योजना के अगले चरण में तीन बड़े फोकस होंगे.

  • नई और उभरती तकनीकों का इस्तेमाल
  • बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण
  • टेक्नोलॉजी और सेवाओं को और बेहतर बनाना

सरकार के मुताबिक, IVFRT के तहत मोबाइल आधारित सेवाएं, सेल्फ-सर्विस कियोस्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे यात्रियों को तेज और आसान सेवाएं मिलेंगी.

पिछले कुछ वर्षों में इस सिस्टम के जरिए ई-वीजा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और कॉन्टैक्टलेस हो गई है, जिसमें 91% से ज्यादा आवेदन 72 घंटे के भीतर क्लियर हुए हैं. वहीं, एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस का समय घटकर 2.5–3 मिनट रह गया है और फास्ट ट्रैक ई-गेट्स के जरिए यह समय 30 सेकंड तक हो गया है.

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सरकार का मानना है कि इस योजना से पर्यटन, व्यापार, एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को बड़ा फायदा होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

First published on: Mar 25, 2026 06:43 PM

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