Pippa: विद्रोही कवि के गाने पर बंगाल से बांग्लादेश तक विद्रोह; करार ओई लोहो कोपट का रिमेक बनाकर फंसे एआर रहमान

A R Rahman in Dispute For the remake of 100 Years Old Song Karar Oi Louho Kapat: बहुप्रतीक्षित फिल्म पिप्पा का संगीत देने वाले संगीतकार एआर रहमान 100 साल पुराने गाने का रीमेक करके बुरे फंस गए हैं। उनके खिलाफ बंगाल से बांग्लादेश तक विरोध खड़ा हो गया है।

AR Rahman

अमर देव पासवान/कोलकाता

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भारतीय संगीत उस्ताद एआर रहमान विवाद में आ गए। विवाद विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम के द्वारा लिखे गए पिप्पा फिल्म के विद्रोही गाने करार ओई लोहो कपट का है, जिसे एआर रहमान ने अपने अंदाज में एकदम नए तरीके से पेश किया है। अब इस गाने को लेकर बंगाल से बांग्लादेश तक विद्रोह खड़ा हो गया है। लोगों का मानना है कि रिमेक में गाने को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ तो दिया गया। साथ ही इसमें बांगला भाषा का सही से उपयोग और उच्चारण नहीं किया गया। जहां तक ऑरिजिनल गाने की बात है, यह 100 साल से भी ज्यादा पुराना हो चुका है, लेकिन बावजूद उसके इस गाने को सुनकर आज भी लोगों के शरीर मे देशभक्ति की एक नई ऊर्जा पैदा हो जाती है।

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देखें विवादित गाने का वीडियो

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शुक्रवार को प्राइम वीडियो पर हुआ है फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर

बता दें कि शुक्रवार 10 नवंबर को प्राइम वीडियो पर एक बहुप्रतीक्षित फिल्म (अरसे पहले पूरी हो चुकी अभिनेता ईशान खट्टर की फिल्म ‘पिप्पा’) का वर्ल्ड प्रीमियर हुआ है। इस फिल्म की पृष्ठभूमि 1971 की भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के हीरो ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता की किताब ‘द बर्निंग चाफीज’ पर आधारित है। इसमें ईशान खट्टर ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता की भूमिका में हैं। आरएसवीपी और रॉय कपूर फिल्म्स के बैनर तले बनी आर राजा कृष्ण मेनन द्वारा निर्देशित इस फिल्म को ‘पिप्पा’ नाम एम्फीबियस वॉर टैंक पीटी-76 (पलावुशी टैंका) से मिला है, जिसे पिप्पा के नाम से जाना जाता था। जहां तक वजह की बात है, यह घी के खाली डिब्बे की तरह पानी पर तैयर सकता था। देशभक्ति पर आधारित इस फिल्म का संगीत ए आर रहमान ने दिया है और यही फसाद की वजह भी बन गया। दरअसल, एआर रहमान ने विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम के द्वारा लिखे गए विद्रोही गाने करार ओई लोहो कपट अपने अंदाज में एकदम नए तरीके से पेश किया है।

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विद्रोही कवि काजी नजरुल के परिवार और दूसरे लोगों में नाराजगी

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गाने के रिमेक से नाराज हो चुके लोगों का आरोप है कि रहमान ने इस गाने को पूरी तरह तोड़-मरोड़ दिया। इसमें बांग्ला भाषा का सही उच्चारण नहीं किया गया, वहीं कहीं भी कवि के द्वारा लिखे गए इस विद्रोही गाने की ऑरिजनल सुर और लय नहीं मिल रही। अब पश्चिमी बंगाल से बांग्लादेश तक लोग एआर रहमान के खिलाफ आंदोलन करने की तैयारी में जुट गए हैं। इसी के साथ आसनसोल के चुरुलिया इलाके में रह रहे काजी नजरुल के परिवार की एक महिला सदस्य सोनाली काजी ने एआर रहमान पर विद्रोही कवि के द्वारा लिखे गए गाने को तोड़-मरोड़कर सारे सुर-ताल बिगाड़ते हुए लोगों के दिलों को ठेस पहुंचाने का काम किया है। विद्रोही कवि का अपमान करने और लोगाें की भावनाएं आहत करने के मामले में गायक एआर रहमान को भूल सुधारनी चाहिए।

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