Women Reservation Bill: 33% आरक्षण, 850 लोकसभा सीटें और… क्या हैं संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्रशासित प्रदेश कानून बिल?

Women Reservation Bill: देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए 3 बिल पेश पारित कराए जाने हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। आइए इन तीनों के बिलों के बारे में विस्तार से जानते हैं…

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महिला आरक्षण को लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है।

What is Women Reservation Bill: दिल्ली में आज 16 अप्रैल से संसद का 3 दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जो 18 अप्रैल तक चलेगा। इन 3 दिन में लोकसभा और राज्यसभा में साल2 2023 में पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऑपरेशनल करने के लिए 3 बिल पेश किए जाएंगे। केंद्र सरकार का लक्ष्य संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक) 2026 पर दोनों सदनों में चर्चा कराकर पारित कराने का लक्ष्य है।

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लोकसभा में 18 घंटे की मैराथन बहस होगी

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल 2 बिल पेश करेंगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बिल पेश करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में तीनों बिलों पर सरकार का पक्ष रखेंगे। पहले तीनों बिल लोकसभा में पेश किए जाएंगे, जहां इन पर चर्चा के लिए करीब 18 घंटे का समय तय किया गया है। इसके बाद राज्यसभा में चर्चा होगी। यह तीनों बिल अगर पारित हो गए तो राजनीति में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊंचाई मिलेगी।

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क्या है 131वां संविधान संशोधन बिल 2026?

केंद्र सरकार लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल 2026 पेश करेगी। बिल बिल का मकसद लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना है। इन 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों के लिए होंगी। वहीं 35 सीटें केंद्रशासित प्रदेशों के लिए होंगी। अगर यह बिल पास हो गया तो साल 2029 के चुनाव में लोकसभा में 270 से ज्यादा महिला सांसद होंगी। वहीं राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आने के लिए 426 सीटों के बहुमत की जरूरत पड़ेगी।

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क्या है सरकार का परिसीमन विधेयक 2026?

संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक 2026 भी पेश करेगी। इस बिल में साल 2011 की जनगणना के आधार पर देश के सभी निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करना है। इस बिल के पास होते ही साल 2002 का डी-लिमिटेशन एक्ट निरस् हो जाएगा। बिल पारित होने के बाद केंद्र सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी करके नए परिसीमन आयोग का गठन करेगी। सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश इस आयोग के अध्यक्ष होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित चुनाव आयुक्त इस आयोग के सदस्य होंगे। राज्य चुनाव आयुक्तों को भी आयोग का सदस्य बनाया जाएगा। देश के हर राज्य में आयोग की सहायता के लिए 10 सदस्य नामित किए जाएंगे, जिनमें 5 सांसद और 5 विधायक शामिल होंगे। लेकिन इन्हें मतदान या फैसले पर हस्ताक्षर का अधिकार नहीं होगा।

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क्या है केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन बिल?

बता दें कि केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026 भी पेश करेगी। अगर यह बिल पारित हुआ तो दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुदुचेरी समेत उन केंद्रशासित प्रदेशों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता साफ होगा, जहां विधानसभा का प्रावधान है। इस बिल के पारित होने से केंद्रशासित प्रदेश सरकार एक्ट 1963, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार दिल्ली एक्ट 1991 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 में संशोधन होगा। तीनों केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के कामकाज में अहम बदलाव होगा। इन प्रदेशों का नए सिरे से परिसीमन यानी विधानसभा सीटों का पुनर्गठन होगा और एक साथ चुनाव यानी एक देश एक चुनाव के प्रावधान लागू करेगा।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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