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परिसीमन को लेकर बढ़ती सियासी बहस के बीच केंद्र सरकार ने अब एक नया फॉर्मूला सामने रखा है. सरकारी सूत्रों का दावा है कि ‘50% फॉर्मूला’ के जरिए सभी राज्यों की सीटों में संतुलित बढ़ोतरी की जाएगी, ताकि किसी भी क्षेत्र को नुकसान का एहसास न हो और सहमति बन सके.

सूत्रों के मुताबिक, अगर सिर्फ 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता, तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को सीटों के अनुपात में अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता. इसी आशंका को दूर करने के लिए सरकार ने यह प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें हर राज्य की सीटों को अनुपातिक रूप से बढ़ाते हुए करीब 50 प्रतिशत तक विस्तार दिया जाएगा.

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इस फॉर्मूले के तहत तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो सकती हैं, जबकि 2011 की जनगणना के आधार पर यह संख्या करीब 49 होती. इसी तरह केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30, आंध्र प्रदेश की 25 से 37, ओडिशा की 21 से 31, तेलंगाना की 17 से 25 और कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 तक पहुंच सकती हैं.

सरकार का मानना है कि इस तरीके से सभी राज्यों को सीटों में बढ़ोतरी मिलेगी और किसी को भी सीधे नुकसान नहीं होगा. इससे खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों की उस चिंता को कम करने की कोशिश है, जिसमें उन्हें आशंका थी कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है.

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हालांकि, इस फॉर्मूले के बावजूद सियासी बहस पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही. विपक्षी दल अब भी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त है, या फिर संसद में राज्यों के प्रभाव और प्रतिनिधित्व के संतुलन पर भी व्यापक चर्चा जरूरी है.

स्पष्ट है कि सरकार इस फॉर्मूले के जरिए सहमति का रास्ता तलाश रही है, लेकिन परिसीमन का मुद्दा अब भी राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी पर टिका हुआ है.

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First published on: Apr 15, 2026 06:31 PM

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